तहसीलदार, नायब तहसीलदार और जिला राजस्व अधिकारी (डीआरओ) सरकार के खिलाफ भड़क गए हैं। पदोन्नति कोटा कम किए जाने पर सोमवार को राजस्व अधिकारियों ने पैन डाउन हड़ताल की।
तहसीलों और सब तहसीलों में नायब तहसीलदारों और डीआरओ ने काले बिल्ले लगाकर सरकार के फैसले का विरोध किया। अधिकारियों के एक दिन हड़ताल पर जाने से प्रदेश में न तो जमीन संबंधित रजिस्ट्रियां हुईं और न ही इंतकाल।
शपथ पत्र और प्रमाण पत्र बनाने के लिए लोगों को तहसीलों में भटकना पड़ा। एक ही दिन में सरकार को 12 करोड़ रुपये की चपत लगी है।
प्रदेश में 89 तहसीलें, 50 उप तहसीलें हैं, जहां पूरा दिन काम ठप रहा। इसके अलावा अन्य विभागों में तैनात तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने काम नहीं किया। एसोसिएशन का कहना है कि प्रदेश सरकार ने तहसीलदारों से एचएएच बनने का कोटा 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी किया है।
इससे तहसीलदारों की पदोन्नति रुक गई है। प्रदेश में ऐसे दर्जनों तहसीलदार हैं, जिनका एचएएच बनना तय था, लेकिन पदोन्नति कोटा कम होने से पदोन्नति नहीं हो सकती है।
राजस्व विभाग में पटवारी, कानूनगो और तहसीलदारों के सैकड़ों पद खाली हैं, लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है।
प्रदेश राजस्व अधिकारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष नारायण चौहान ने बताया कि जब तक प्रदेश सरकार पदोन्नति कोटा नहीं बढ़ा देती, विरोध जारी रहेगा।
कहा कि एसोसिएशन सरकार से पदोन्नति कोटा 35 फीसदी की मांग कर रही है। अगर सरकार अपना फैसला नहीं बदलती है तो तहसीलदार चुप बैठने वाले नहीं हैं। महासंघ ने 24 अगस्त को मंडी में राज्य स्तरीय बैठक बुलाई है। इसमें आगामी रणनीति तैयार होगी।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष नारायण चौहान ने बताया कि 11 अगस्त को पैन डाउन हड़ताल का काम 15 अगस्त को किया जाएगा। इस दिन तहसीलदार कैंडल लाइट में काम करेंगे।
वहीं, 19 अगस्त को फिर तहसीलदार पैन डाउन स्ट्राइक करेंगे। इसके बदले में तहसीलदार 24 तारीख यानी रविवार को कैंडल लाइट में अपनी सेवाएं देंगे।