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कैग रिपोर्ट में खुलासा: हिमाचल सरकार और विभाग की सुस्ती से समय पर नहीं बने ट्रॉमा सेंटर

Wed, 16 Mar 2022 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

केंद्र ने टांडा, चंबा, हमीरपुर, मंडी और रामपुर अस्तपतालों में ट्रॉमा सेंटर खोलने के लिए करोड़ों रुपये दिए थे, लेकिन राज्य सरकार ने अपने हिस्से का बजट जारी करने में आठ से 16 महीने की देरी की। जुलाई 2020 तक चंबा, हमीरपुर और मंडी में ट्रॉमा सेंटर के लिए 92 लाख रुपये जारी नहीं किए गए। यह खुलासा कैग रिपोर्ट में हुआ है। 
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कैग - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश सरकार और विभाग की सुस्ती से हिमाचल प्रदेश में समय पर ट्रॉमा सेंटर नहीं बन सके। राज्य सरकार समय पर अपना अंश देने में विफल रही। केंद्र ने टांडा, चंबा, हमीरपुर, मंडी और रामपुर अस्तपतालों में ट्रॉमा सेंटर खोलने के लिए करोड़ों रुपये दिए थे, लेकिन राज्य सरकार ने अपने हिस्से का बजट जारी करने में आठ से 16 महीने की देरी की। जुलाई 2020 तक चंबा, हमीरपुर और मंडी में ट्रॉमा सेंटर के लिए 92 लाख रुपये जारी नहीं किए गए। यह खुलासा कैग रिपोर्ट में हुआ है। 

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हिमाचल प्रदेश में इन सेंटर को स्थापित करने और घायलों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 30.04 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जानी थी। इसके लिए केंद्र सरकार ने 27.04 करोड़ रुपये जबकि राज्य सरकार को दस फीसदी की दर से तीन करोड़ रुपये की राशि खर्च करनी थी। केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को 17.09 करोड़ रुपये की पहली किश्त जारी कर दी। लेकिन सरकार कई ट्रॉमा सेंटर के लिए अपना अंश जारी नहीं कर पाई। 

विधानसभा के सभा पटल पर रखी गई कैग रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार को टांडा मेडिकल कॉलेज, चंबा, मंडी, हमीरपुर और रामपुर स्थित पांच अस्पतालों के लिए 1.90 करोड़ रुपये की राशि को देना आवश्यक था। राज्य सरकार ने टांडा, रामपुर के लिए 1.33 करोड़ रुपये की राशि जारी की जबकि जुलाई 2020 तक चंबा, हमीरपुर और मंडी स्थिति अस्पतालों के संबंध में 0.92 करोड़ रुपये की राशि जारी नहीं की है।
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बिजली बोर्ड को वहन करना पड़ा 198 करोड़ का ट्रांसमिशन शुल्क
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में 400/200 केवी सब स्टेशन में डाउन स्ट्रीम सिस्टम के पूर्ण न होने के कारण राज्य बिजली बोर्ड को 198.91 करोड़ रुपये का ट्रांसमिशन शुल्क वहन करना पड़ा। कैग रिपोर्ट में डाउनस्ट्रीम सिस्टम के पूरा होने तक शुल्क और बढ़ने की संभावना जताई गई है। कैग रिपोर्ट के मुताबिक बिजली बोर्ड पांच वर्षों तक भूमि का अधिग्रहण करने में विफल रहा। इस कारण डाउनस्ट्रीम सिस्टम निर्मित नहीं किया जा सका। 

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