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Himachal: कैडर कटौती मुद्दे पर बंटे पूर्व अफसर, प्रशासन से प्रमोशन तक के असर गिनाए, विक्रमादित्य ने ये कहा

Wed, 19 Aug 2026 01:33 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से आईएएस, आईपीएस और आईएफएस का कैडर कम करने की जरूरत जताने के बाद ब्यूरोक्रेसी में शीर्ष पर रहे कुछ अधिकारियों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।
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आईएएस-आईपीएस अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से आईएएस, आईपीएस और आईएफएस का कैडर कम करने की जरूरत जताने के बाद ब्यूरोक्रेसी में शीर्ष पर रहे कुछ अधिकारियों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। पूर्व मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में यह देखना होगा कि क्या प्रशासनिक ढांचा, इकाइयां व इनकी स्थिति कम हुई हैं। अगर हुई हैं तो कैडर कम करना उचित लगता है। इस फैसले से अधिकारियों का प्रमोशन का चैनल प्रभावित होगा। पूर्व मुख्य सचिव वीसी फारका ने कहा कि हर पांच साल बाद आईएएस का कैडर रिव्यू होता है।

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उस समय राज्य सरकार केंद्र सरकार के समक्ष अपनी बात रख सकती है। आईएएस अधिकारियों का वेतन का खर्च भारत सरकार वहन करती है। ऐसे में खर्च घटाने वाली कोई बात नहीं है। पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण श्रीधर ने कहा कि कैडर हर चार-पांच साल रिव्यू होता है। देखना होगा कि सरकार यह फैसला स्टडी करने के बाद ले रही है या इंपल्सिव है। इससे पदोन्नतियों के पद भी घटेंगे। पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. विनोद धवन ने कहा कि स्टाफ युक्तिकरण से होना चाहिए। देखना जरूरी है कि सर्विस डिलीवरी में किसका रोल है। 

ऊपर ज्यादा अधिकारी, नीचे कम कर्मचारी : विक्रमादित्य
 लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आईएएस, आईपीएस और आईएफएस की संख्या कम किए जाने के मामले में कहा कि इस मामले को लेकर काफी समय से एक्सरसाइज चल रही है। कैबिनेट में भी इस मामले में चर्चा हुई है। वर्तमान स्थिति ये है कि ऊपर ज्यादा अधिकारी हो गए है जबकि निचले स्तर पर कम कर्मचारी है। पहले लोकनिर्माण विभाग और जल शक्ति विभाग एक हुआ करता था। अब लोक निर्माण विभाग में 2 ईएनसी और जल शक्ति विभाग में 3 ईएनसी है। डिजिटल का जमाना है। लोक निर्माण विभाग में भी यह एक्सरसाइज करने की जरूरत है। 

आईपीएस कैडर 96 से 75 पद करने की तैयारी
हिमाचल में  आने वाले समय में आईपीएस अधिकारियों की संख्या घट सकती है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने आईपीएस कैडर को कम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग ने मौजूदा 96 पदों के कैडर को घटाकर 75 करने का शुरुआती प्रस्ताव तैयार किया है। अब इस प्रस्ताव पर विधानसभा के मानसून सत्र के बाद होने वाली कैबिनेट बैठक में चर्चा होगी। कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गृह सचिव से रिपोर्ट मांगी थी कि प्रदेश का पुलिस प्रशासन न्यूनतम कितने आईपीएस अधिकारियों के साथ प्रभावी ढंग से चलाया जा सकता है। इसके बाद गृह विभाग ने वरिष्ठ अधिकारियों के पदों की वास्तविक जरूरत, उपलब्ध मानव संसाधन और लंबे समय से खाली चल रहे पदों का आकलन किया। इसी आधार पर कैडर को कम करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सरकार का मानना है कि प्रदेश की मौजूदा वित्तीय स्थिति में बड़े प्रशासनिक ढांचे का खर्च कम करना जरूरी है।
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रिटायरमेंट के बाद नए कैडर के हिसाब से भरेंगे पद
इसी दृष्टि से अधिकारियों के स्वीकृत पदों और उनकी वास्तविक जरूरत की समीक्षा की गई है। लंबे समय से खाली चल रहे पद भी सरकार के आकलन का हिस्सा रहे हैं। प्रस्ताव का उद्देश्य जरूरत के मुताबिक आईपीएस अधिकारियों की संख्या तय कर प्रशासनिक खर्च को नियंत्रित करना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद आईपीएस अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने से खाली होने वाले पदों को मौजूदा 96 पदों के आधार पर नहीं, बल्कि नई स्वीकृत कैडर संख्या के आधार पर भरा जाएगा। यानी यदि 75 पदों का कैडर मंजूर होता है तो भविष्य में रिक्त होने वाले पदों को इसी संख्या की सीमा में भरा जाएगा। हिमाचल कैडर के चार आईपीएस अधिकारी वर्ष 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इनमें अनुराग गर्ग, एन. वेणूगोपाल, डॉ. डीके चौधरी और डॉ. वीरेंद्र कुमार शामिल हैं। कैडर घटाने का प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में इन अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद खाली होने वाले पदों को भी नई कैडर संख्या और सरकार की जरूरत के अनुसार ही भरा जाएगा।
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