मुख्य अन्वेषक डॉ. प्रियंका ठाकुर ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य डेहलिया की डीयूएस टेस्टिंग के दिशा-निर्देशों का मकसद विकास और फूल की विभिन्न प्रजातियों का मूल्यांकन करना है। स्टेशन पर डेहलिया के लिए डीयूएस केंद्र की स्थापना का काम चल रहा है।
धौलाकुआं केंद्र के एसोशिएट डायरेक्टर डॉ. एके जोशी ने बताया कि डेहलिया परीक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर के लीड सेंटर की मान्यता पाना बड़ी उपलब्धि है। नौणी विवि के कुलपति डॉ. एचसी शर्मा और अनुसंधान निदेशक डॉ. जेएन शर्मा ने इसके लिए वैज्ञानिकों को बधाई दी।
हिमाचल के किसान इस नई फसल को कट फ्लावर के साथ-साथ, पॉट प्लांट प्रोडक्शन के लिए भी अपना सकते हैं। इससे प्रदेश कि अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ेगी।
केंद्र के शोध में पाया है कि माटुंगिनी, मदर टेरेसा, सिस्टर निवेदिता, तेनजिन, सूर्यदेव, जिशु, गिलोडी, एसपी कमला जैसी किस्में निचली पहाड़ी परिस्थितियों के लिए उपयुक्त हैं।
पौधों की ऊंचाई विभिन्न किस्मों में अलग-अलग पाई जाती है। इसका आकार दो इंच लॉलीपॉप शैली से लेकर विशाल 10-15 इंच डिनर प्लेट जैसा होता है। फूल के पौधे 4-5 फीट की ऊंचाई तक बढ़ सकते हैं। फरवरी से मई तक यह फूल खिला रहता है। नौणी विवि के छात्र भी डेहलिया की किस्मों के मूल्यांकन पर काम कर रहे हैं।