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वैज्ञानिकों ने जताई चिंता, रिसर्च में सामने आई मैदानों में बढ़ रही धुंध और ठंड की वजह

Sun, 14 Jan 2018 12:58 PM IST
मनोज शर्मा, अमर उजाला, नगवाईं (मंडी)
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पेड़ों का अंधाधुंध कटान, सैलानियों के साथ वाहनों की भारी भीड़ और खुले में कचरा जलाने जैसी मानव गतिविधियों से हिमाचल में पर्यावरण संतुलन गड़बड़ाता जा रहा है।

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इसका सीधा प्रभाव पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के मैदानी इलाकों में असाधारण धुंध और ठंड के रूप में देखने को मिल रहा है। इसका मुख्य कारण हिमालयी पर्यावरण में रेडिएशन में बदलाव माना जा रहा है।

प्रदूषण रोकने की तमाम नीतिगत कोशिशें देवभूमि की आबोहवा में पर्यावरण संतुलन साधने में नाकाम हो रही हैं। बदलते तापमान से सेब समेत अन्य पैदावार भी प्रभावित हो रही है।
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गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के शोध में यह खुलासा किया गया है। चिंता जताई गई है कि हालात यही रहे तो मौसम परिवर्तन खासी दिक्कतें बढ़ाएगा।

बढ़ रहा है तापमान

गोविंद बल्लभ पंत संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जेसी कुनियाल ने बताया कि प्रदूषण के कारण रेडिएशन बजट में परिवर्तन जारी है।

आंकड़ों के मुताबिक वायुमंडल में ऐरोसोल (प्रदूषण के कण और जहरीली गैसों) ऑप्टिकल घनत्व वर्ष 2012-13 में 500 नैनोमीटर पर 0.26 (एरोसोल ऑप्टिकल डैप्थ) दर्ज किया, जबकि वर्तमान में यह आंकड़ा 0.30 तक पहुंचा है। इससे तापमान बढ़ रहा है।

वायुमंडल के तापमान में 0.64 कैल्विन प्रतिदिन परिवर्तन हो रहा है। लिहाजा, सूर्य से आने वाली रेडिएशन को पृथ्वी के धरातल के नजदीक वायुमंडल में बढ़ते प्रदूषण से एरोसोल्स सोख रही हैं।

प्रदेश में इसरो द्वारा तैयार मल्टीवेव लेंथ रेडियो मीटर से रेडिएशन बजट को मापा जा रहा है।
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प्रदूषण के मुख्य कारण

इसका प्रभाव इंडो गैंगेटिक तक पड़ रहा है। पंजाब से उत्तर प्रदेश और बंगाल तक इसका प्रभाव पड़ रहा है। असामान्य धुंध, बादल फटने जैसी अप्राकृतिक आपदाएं हो रही हैं। इस परिवर्तन के कारण विंटर में कूलिंग इफेक्ट के कारण धुंध और हेज जैसी समस्याएं हो रही हैं। 

ये है रेडिएशन बजट
रेडिएशन बजट अंतरिक्ष से आने वाली रेडिएशन और धरती से टकराकर वापस जाने वाली रेडियो किरणों को मापने का यंत्र है, जो वातावरण में संतुलन बैठाता है। तीन स्तर पर इसका अध्ययन किया जाता है। धरातल के ऊपर, अपर लिमिट में वातावरण देखा जाता है, जिसमें एरोसोल को मापा जाता है।

प्रदूषण के मुख्य कारण
प्रदूषण के मुख्य कारण कारखानों से निकलने वाली जहरीली गैस, गाडि़यों का धुआं, कचरे को जलाने आदि से प्रदूषण बढ़ता है। इन गतिविधियों के कारण धरती पर विषैली व हानिकारक गैस की मात्रा बढ़ रही है। इन गैसों में कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रस सल्फर डायऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड पर्यावरण को प्रभावित कर रही हैं।
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