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शोध में खुलासा, भारत में सबसे ज्यादा सेहतमंद रहते हैं इन इलाकों के लोग

Fri, 23 Sep 2016 12:22 PM IST
प्रखर दीक्षित/अमर उजाला, शिमला
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भारत में जहां औसतन हर चार में से एक व्यक्ति डायबिटीज, हाइपरटेंशन, न्यूरो जैसी गैर संक्रमित बीमारियों से ग्रस्त है, वहीं हिमालय की ऊंची चोटियों पर रहने वाले कबायली इनसे अछूते हैं।
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हिमाचल और देश के अन्य राज्यों के जनजातीय लोग मैदानी और पहाड़ी इलाकों के लोगों से 80 फीसदी कम बीमार होते हैं। सामान्य तौर पर सभी में पाई जाने वाली बीमारियां इन्हें होती ही नहीं हैं।

कांगड़ा के डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की फैकल्टी की ओर से किए गए शोध में इसका खुलासा हुआ है। बीमारियां न होने के पीछे शोधकर्ताओं ने बेहतर गुणवत्ता वाले प्राकृतिक खानपान और जीवनशैली को प्रमुख कारण बताया है।
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शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर लोग ट्राइबल्स जीवनशैली को 30 से 50 फीसदी तक भी अपना लेते हैं तो देशभर में बढ़ती डिमेंशिया, डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों से निजात मिल सकती है।

शोध में खुलासा ये बीमारियां छू भी नहीं पाती

कबाइली लोगों पर हुए शोध के अनुसार इनमें हाइपरटेंशन की बीमारी बहुत कम होती है। शोध के दौरान महज 10.7 प्रतिशत लोगों में हाइपरटेंशन के लक्षण मिले। पूरे हिमाचल की बात करें तो 36 फीसदी लोग हाइपरटेंशन से ग्रस्त रहते हैं।

ऊंचाई पर रहने वाले लोगों में मोटापा भी नहीं होता। हालांकि, मूल इलाकों से पलायन करने वाले ट्राइबल जरूर मोटापे और अन्य बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। कबायलियों में न्यूरो से जुड़ी डिमेंशिया से ग्रस्त एक भी मरीज नहीं पाया गया।
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इन कारणों से फिट रहते हैं कबाइली

शोधकर्ता डॉ. सुनील कुमार रैना ने बताया कि ट्राइबल लोगों के फिट रहने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें पर्यावरण, जीवन शैली और जेनेटिक डिफरेंस वजहें हो सकती हैं। रैना ने बताया कि कबायली लोग ज्यादा शारीरिक श्रम करते हैं।

इसके अलावा खानपान में भी कई वैराइटी उनके फिट रहने का एक कारण हो सकता है। दरअसल, ऊंचाई पर रहने वाले लोग जौ, गेहूं, मक्की जैसे परंपरागत अनाज खुद उगाकर खाते हैं। इसके अलावा सेब और अखरोट जैसे एंटीआक्सीडेंट्स युक्त फल भी ज्यादा खाते हैं। साफ पानी और स्वच्छ हवा भी एक कारण है।
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