लाहौल और चंबा जिले को जोड़ने वाले जोवरंग-मणिमहेश ट्रैक पर कुगती पास (16,600 फीट) का डर अब श्रद्धालुओं को नहीं सताएगा। लाहौल-स्पीति प्रशासन इस ट्रैक पर पहली बार बचाव चौकी स्थापित करेगा। इससे यहां से आवाजाही करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, चार दिन के थकावट भरे ट्रैक पर सफर करना जोखिम भरा है।
ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते और ग्लेशियरों से होते हुए श्रद्धालुओं और ट्रैकरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कई श्रद्धालु इस ट्रैक पर चोटिल भी हुए हैं। विदेशी ट्रैकरों का भी यह पसंदीदा ट्रैक है। लाहौल, कुल्लू के श्रद्धालु भी काफी संख्या में इसी ट्रैक से पदयात्रा कर मणिमहेश झील पहुंचते हैं। लाहौल के बुजुर्गों की मानें तो यहां से पदयात्रा करने से श्रद्धालुओं की मनोकामना अवश्य पूरी होती है।
जोबरंग-मणिमहेश ट्रैक पर कुगती पास का सफर पथरीला और थकाऊ जरूर है, लेकिन श्रद्धा के आगे इस पड़ाव में श्रद्धालु अपनी मुरादों को लेकर नंगे पांव भी निकल पड़ते हैं। अमूमन, यह ट्रैक जून से सितंबर तक ही श्रद्धालुओं व ट्रैकरों के लिए खुला रहता है। लाहौल निवासी राम चंद, प्रेम सिंह और शाम लाल ने कहा कि त्रिलोकनाथ में मनाए जाने वाले पोरी मेले के समापन पर श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था इसी ट्रैक से होकर मणिमहेश झील को निकलता है।
नालडा गांव के शाम चंद ने कहा कि लाहौल के जोवरंग से मणिमहेश तक पहुंचने में श्रद्धालुओं को खोलडु पदर, केलिंग बजीर और अल्यास के तीन पड़ाव पार करने पड़ते है। उधर, उपायुक्त लाहौल-स्पीति पंकज राय ने कहा कि श्रद्धालुओं व ट्रैकरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस सीजन से इस ट्रैक पर बचाव चौकी स्थापित की जाएगी।