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रेणुका हादसा: बदइंतजामी से घायलों की जान पर बन आई, इमरजेंसी में थे महज दो डॉक्टर

Mon, 26 Nov 2018 02:07 PM IST
संजय भारद्वाज, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
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श्री रेणुका-नाहन मार्ग पर निजी बस हादसे के बाद घायलों को रेस्क्यू करने से लेकर इलाज की प्रक्रिया में बदइंतजामी से घायलों की जान पर बन आई। पहले दुर्घटनास्थल पर चीख पुकार के बीच घायल एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। जैसे तैसे बस में घायलों को अस्पताल पहुंचाया तो इलाज के इंतजाम नाकाफी पड़ गए। स्ट्रेचर पर रखे शवों को हटाकर घायलों को शिफ्ट करना पड़ा।

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हादसे के तुरंत बाद अस्पताल प्रशासन को सूचित करने के बावजूद प्राथमिक उपचार के लिए तैनात अमला कम पड़ गया। एक साथ दर्जनों घायलों के अस्पताल पहुंचने पर अफरातफरी का माहौल रहा। हालांकि घंटों बाद इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों की संख्या तीन से 25 तक पहुंचाई गई।

दरअसल, जलाल नदी में बस गिरने के बाद चीख पुकार मचा हुआ था। संबंधित एजेंसियों को सूचित कर एंबुलेंस मंगवाई गई। दुर्घटनाग्रस्त बस के पीछे आ रहे कुछ लोगों ने बताया कि सूचना के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम दुर्घटनास्थल पर नहीं आई। जब एंबुलेंस भी समय पर नहीं पहुंची तो ज्यादातर घायलों को निजी बस और अन्य निजी वाहनों से नाहन मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। हालांकि बाद में कुछ घायल एंबुलेंस से लाए गए।
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घायल अस्पताल परिसर तक पहुंचाए जाने पर स्ट्रेचर ही नहीं मिले। ऐसे में स्ट्रेचर पर रखे गए शवों को हटाकर हादसे के घायलों को इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचाया गया। अस्पताल को पहले ही दर्जनों घायल आने की सूचना दी गई थी। इसके बावजूद मौके पर इमरजेंसी में दो ही डॉक्टर थे। शाम तक जाकर दो दर्जन डॉक्टरों को इमरजेंसी में लगाया गया।

मौके पर घंटों नजर नहीं आए अफसर

मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डा. केके पराशर ने अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था का दावा किया है। उन्होंने कहा कि 25 के करीब चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। जबकि सीएमओ डॉ. संजय शर्मा ने मौके पर एंबुलेंस भेजने का दावा कर कहा, हो सकता है एंबुलेंस से पहले घायलों को निजी वाहनों और बस में डाला गया हो। घायलों को त्वरित उपचार के लिए ऐसा किया जाता है।

नदी में बस गिरने जैसे बड़े हादसे के बावजूद प्रशासनिक अफसर न तो दुर्घटनास्थल पर नजर आए और ना ही घंटों अस्पताल में दिखाई दिए। हालांकि बाद में कुछ अधिकारियों ने अपनी हाजिरी जरूरी लगाई।

जिला सिरमौर में निजी बस हादसों का रिकार्ड...
1. - शिलाई में 17 अगस्त 1999 में निजी बस सड़क हादसे में 
21 लोगों की मौत तथा 60 यात्री घायल हो गए थे। 
2.  शिलाई के मिल्लाह रोड़ पर 7 अप्रैल 2014 को निजी बस गहरी खाई में गिरने से 18 की मौत व 47 लोग घायल हुए थे।
3. शिलाई के टटियाना मार्ग पर 29 अक्टूबर 2015 को निजी ब खाई में गिरने से 5 की मौत व 38 लोग घायल हुए थे।
4- सिरमौर के सोलन हाबन से चंबीधार मार्ग पर 26 फरवरी 2016 को एक निजी बस हादसे में 7 की मौत व 17 घायल हो गए थे। 
5- सिरमौर के सोलन राजगढ़ मार्ग पर सनोरा में नई नेती के समीप 13 मई 2018 को निजी बस हादसे में 8 की मौत व 12 लोग घायल हुए थे।
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गड्ढे से बचने के चक्कर में खाई में जा गिरी बस

बस तेजरफ्तार में चल रही थी। मोड़ पर चालक ने गड्ढे से बचने को बस थोड़ी बाहर निकाली। इससे कई पलटे खाकर बस खाई में जा गिरी। बस के खाई में गिरते ही लोगों की चीखपुकार मच गई। यह बात हादसे में घायल पेशे से निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर रंजीत शुक्ला ने कही। वे आईजीएमसी में भर्ती हैं।

रंजीत और एक अन्य घायल मोहम्मद हिलाल ने बताया कि चालक को अधिक चोटें आई हैं। उन्होंने बताया कि वे 24 नवंबर को नोएडा से शिमला घूमने आए थे। जुन्गा स्थित एक निजी होटल में ठहरे थे। दिल्ली से निजी बस किराये पर लेकर आए थे। रविवार को कंपनी के 19 लोगों के साथ चालक और कंडक्टर लौट रहे थे, लेकिन क्यारी के पास हादसा हो गया।

हादसे के बाद दस घायलों को आईजीएमसी लाया गया। यहां इमरजेंसी में इलाज देकर मरीजों के एक्सरे करवाए गए। डॉक्टरों के मुताबिक घायलों को गंभीर चोटें नहीं हैं। केवल एक ही व्यक्ति को अधिक चोट है। उधर, घटना के बाद जिला प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंची थी। आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनकराज ने बताया कि बस हादसे में दस घायल आईजीएमसी पहुुंचे हैं। सभी घायलों को अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में उपचार दिया गया है।

बस ड्राइवर समेत दस घायल पहुंचे आईजीएमसी 
साधुपुल के क्यारी में हादसे में घायल दस लोगों को दोपहर बाद पौने तीन बजे आईजीएमसी लाया गया। चालक सलीम की हालत नाजुक बनी हुई है। उसे डॉक्टरों की निगरानी में इलाज दिया जा रहा है। 
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