अद्भुत, अलौकिक और अविस्मरणीय। श्री रेणुकाजी अंतरराष्ट्रीय उत्सव पर कुछ इसी तरह का स्वर्ग तुल्य नजारा देखने को मिल रहा है। बुधवार दोपहर बाद मां-पुत्र के मिलन का प्रतीक रेणुका उत्सव धूमधाम के साथ शुरू हो गया है। आज दूसरे दिन भी मेले में भारी जन सैलाब उमड़ आया है।
बुधवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने देव पालकियों को कंधा देकर मेले का विधिवत शुभारंभ किया था। मां-पुत्र के अटूट और पारंपरिक मिलन के नाम पर मनाए जाने वाले इस ऐतिहासिक मेले में देवताओं के दर्शन पाने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा हुआ है।
शोभा यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को निकट से देवताओं के दर्शन पाने का अवसर भी मिला। शोभा यात्रा बुधवार दोपहर बाद स्थानीय खेल मैदान से शुरू होकर ददाहू बाजार, गिरिपुल, बडोल, देेवशिला और मेला मैदान से होती हुई शाम ढलने से पूर्व रेणुका जी स्थित मंदिर परिसर में पहुंची। जहां पवित्र त्रिवेणीघाट संगम पर देव मिलन की परंपरा को निभाया गया।
प्राकृतिक लोक वाद्य यंत्रों, शंभ घड़ियाल और ढोल नगाड़ों के साथ-साथ बैंड बाजों के बीच निकाली गई इस शोभायात्रा के दौरान संपूर्ण रेणुका घाटी भक्तिरस में डूब गई। इसके अतिरिक्त पुलिस और होमगार्ड बैंड सहित सीनियर सेकेंडरी स्कूल ददाहू के बच्चों की ओर से किए गए जयघोष से माहौल गुंजायमान हो उठा। शोभा यात्रा में सर्वप्रथम भगवान परशुराम के प्राचीन और प्रसिद्ध जामू मंदिर, कटाहा मंदिर, माशू व मंडलाह के देव मंदिरों से लाई गई देव पालकियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
अस्वस्थ होने के बावजूद सीएम ने निभाई परंपरा
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह बुधवार दोपहर को ददाहू में देवताओं की पूजा अर्चना के बाद देव पालकियों को कंधा देकर रेणुकाजी के लिए रवाना किया। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद रेणुका मेले के उद्घाटन की देव परंपरा को निभाना नहीं भूले।