हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह आय से अधिक संपत्ति मामले में तीन पृष्ठों में लिखित पक्ष रखने का निर्देश दिया है। वहीं, हिमाचल सरकार ने बुधवार को भी दोहराया कि सीबीआई को जांच का अधिकार नहीं है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी के समक्ष राज्य सरकार के अधिवक्ता ने बुधवार को भी बहस जारी रखी। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वे तीन पृष्ठों में अपना लिखित पक्ष रखें। कोर्ट ने मामले में सुनवाई दो दिसंबर तय की है।
राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि सीबीआई तय कानून के तहत राज्य सरकार की एजेंसी नहीं है, जो राज्य में हुए किसी अपराध की जांच करें। उन्होंने कहा जब सीबीआई को जांच का अधिकार ही नहीं है, तो वह कैसे मामले में अदालत से आरोपपत्र दाखिल करने की इजाजत मांग सकती है।
अधिवक्ता ने कहा कि एजेंसी अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई कर रही है। स्पष्ट है कि वह प्रभाव में है। आखिर इस मामले में उसकी इतनी रुचि क्यों है। उन्होंने कहा कि सीबीआई प्रदेश सरकार की ताकत को खत्म करना चाहती है।
बता दें कि सीबीआई ने वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह व अन्य के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। वीरभद्र सिंह ने सीबीआई जांच पर सवाल उठाते हुए दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की मांग की है।