लेखक खुशवंत सिंह की याद में आयोजित लिटफेस्ट में क्रिकेट से कश्मीर तक के मुद्दे खूब सुलगे। लेखकों ने शब्दों के माध्यम से इन मसलों को पिरोने और सही रास्ता ढूंढने के उपाय सुझाए। नस्लभेद और जातीय हिंसा पर भी खूब शब्दवाण चले।
क्रिकेट को तारीफ मिली तो भारतीयता के साथ कश्मीरियों को भी अपनाने के इशारे वक्ता कर गए। सत्र की शुरुआत राजदीप सरदेसाई की पुस्तक डेमोक्रेसी ऑफ इलेवन-हिस्ट्री ऑफ मॉर्डन क्रिकेट के साथ हुई।
सरदेसाई ने नवाब पटौदी से विराट कोहली के वक्त तक हर एक पहलू का बारीकी से विश्लेषण किया। कहा कि क्रिकेट भारत में इकलौता ऐसा खेल है, जिसमें कभी नस्लभेद नहीं हुआ। चाहे खिलाड़ी किसी भी जाति या धर्म से हो, उसे सिर्फ उसकी क्षमता से आंका जाता है।
लोगों ने विनोद कांबली को भी वो ही प्यार दिया, जो उस समय सचिन तेंदुलकर को मिला था। क्रिकेट वक्त के साथ बदला है और आज के खिलाड़ी किसी सेलेब्रिटी से कम नहीं हैं।
कपिल देव ने शुरुआती दिनों में दो हजार रुपये में भी विज्ञापन किया था और आज खिलाड़ी से नहीं, बल्कि उसके एजेंट से बात करनी पड़ती है। पूर्व के किसी भी खिलाड़ी के पास एजेंट नहीं होते थे। महिला क्रिकेट के दिन बदल रहे हैं।
इंदिरा के मुकाबले कहीं नहीं ठहरते नरेंद्र मोदी : घोष
सागरिका घोष ने कहा कि नरेंद्र मोदी भले ही जितनी भी कोशिश कर लें, वे कभी इंदिरा गांधी के मुकाबले खड़े नहीं हो सकते हैं। इंदिरा गांधी का वर्चस्व कायम है। इंदिरा गांधी ने आपातकाल में आरएसएस और जनसंघ के सभी नेताओं को जेल में डाल दिया था।
बावजूद इसके आज भी आरएसएस और भाजपा के लोग कांग्रेस में इंदिरा गांधी को सबसे मजबूत शख्सियत मानते हैं और इंदिरा गांधी के खिलाफ भाजपा में किसी पास बोलने के लिए कुछ नहीं होता है।
इंदिरा गांधी को पुत्र मोह में आपातकाल का सामना करना पड़ा, जो उनके राजनीतिक भविष्य पर धब्बे की तरह है। बावजूद इसके उन्होंने देश में कई ऐसे निर्णय लिए, जो बाद में मिसाल बन गए। सागरिका घोष ने अपनी पुस्तक इंदिरा इनस्क्योर डॉटर, बेटर्ड वाइफ टफ डिकेटर पर आयोजित चर्चा के दौरान यह बात कही।
कश्मीर हमारा है, पर कश्मीरी नहीं : राजदान
जानी मानी पत्रकार निधि राजदान ने कश्मीर समस्या पर चर्चा में कहा कि भारत कश्मीर को तो अपनाना चाहता है, लेकिन कश्मीरियों को नहीं। यह समझना होगा कि हर कश्मीरी मुस्लिम उग्रवादी नहीं है। राह भटके युवाओं को वापस लाने की जरूरत है।
युवाओं को बंदूक की जगह पढ़ाई का रास्ता पकड़ना होगा। उन्होंने राष्ट्रगान पर खड़े न होने की बात की भी कड़ी आलोचना की। कहा कि पाकिस्तान तो हमेशा से गंदा खेल खेलता रहा है, लेकिन मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण हैं।
ज्यादातर चैनल धर्म पर बहस में लगे हैं। इसमें कुछ चुनिंदा धर्म के ठेकेदार बहस के लिए पहुंच जाते हैं और समाज को अपने रुतबे के हिसाब से चलाने के तर्क देते हैं, जो बेहद खतरनाक है।
आशा पारेख द हिट गर्ल पर चर्चा
लिटफेस्ट के दूसरे दिन के आखिरी सत्र में आशा पारेख की पुस्तक द हिट गर्ल पर चर्चा हुई। आशा पारेख के जीवन पर आधारित इस पुस्तक उनके जीवन के हर पहलू का जिक्र है। उन्होंने कहा कि पुस्तक ने उन्हें जीवंत कर दिया है।
आशा पारेख के अलावा दूसरे दिन बच्ची काकड़िया ने इन हॉट ब्लड, शीला रेड्डी ने मिस्टर एंड मिस जिन्हा पुस्तक पर प्रकाश डाला। इस मौके पर कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं।