धार्मिक संस्थाओं ने सरकार के पास जमीनों का तबादला करने के लिए आवेदन किया है।
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हिमाचल में सीलिंग एक्ट के कारण जमीनें न बेच पाने के बाद कई धार्मिक संस्थाओं ने नया तरीका ढूंढ लिया है। अब इन धार्मिक संस्थाओं ने सरकार के पास जमीनों का तबादला करने के लिए आवेदन किया है। करोड़ों की ये जमीनें लोगों ने संतों व संस्थाओं को दान में दी हैं।
इनमें कई संस्थाएं राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का तबादला करके इन्हें बेचने की फिराक में हैं। तर्क दिया जा रहा है कि जमीन बेचने से आए पैसे को श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर खर्च किया जाना है। सरकार में अच्छी पहुंच रखने वाले संत और संस्थाओं के प्रतिनिधि दान में मिली जमीन का तबादला करवाने के लिए सचिवालय के चक्कर काट रहे हैं।
राजस्व विभाग में साधु संतों के जमीन की तबादला करने की फाइल तैयार है। अब इस फाइल में सरकार की मंजूरी लेनी बाकी है। पहले साधु संतों को डेढ़ सौ से ज्यादा बीघा जमीन दान में लेने की अनुमति नहीं थी। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2013 में सीलिंग एक्ट में संशोधन किया।
इसमें साधु संत डेढ़ सौ से ज्यादा बीघा जमीनें दान में ले सकते है, लेकिन उसे बेच नहीं सकते। ऐसे में इन साधु संतों के पास हजारों बीघा जमीनें दान में मिल गई हैं। धार्मिक संस्थाओं के पास शिमला, धर्मशाला, सोलन, कुल्लू, मनाली, किन्नौर, लाहौल-स्पीति, हमीरपुर और बिलासपुर में हजारों बीघा जमीनें है।
सीलिंग एक्ट के तहत धार्मिक संस्थाएं दान में ली हुई जमीन को बेच नहीं सकती हैं। सरकार की अनुमति पर दान की हुई जमीन का तबादला किया सकता है। - तरुण श्रीधर, अतिरिक्त मुख्य सचिव, राजस्व