एजेंसी ने सीबीआई के केस के आधार पर मनी लांड्रिंग का मुकदमा दर्ज किया था। ईडी का आरोप था कि वीरभद्र सिंह ने 28 मई 2009 से 18 जनवरी 2011 और 19 जनवरी 2011 से 26 जून 2012 के दौरान केंद्रीय मंत्री रहते हुए आय से अधिक धन अर्जित किया था।
उस काले धन को वीरभद्र ने अन्य आरोपियों व आनंद सिंह के जरिए बीमा में निवेश किया था। सीबीआई के अनुसार आरंभिक जांच में पाया गया कि वीरभद्र सिंह ने दौरान 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति कथित तौर पर आय से अधिक अर्जित की थी।
आय से अधिक संपत्ति मामले में चार्जशीट के साथ दिए गए दस्तावेजों के विषय में वीर भद्र सिंह की ओर से अर्जी दायर कर कहा गया कि जो दस्तावेज सीडी में दिए गए हैं जो पुराने फॉरमेट में है और कंप्यूटर पर चल नहीं रही है।
इसलिए यह दस्तावेज नये फॉरमेट की सीडी में दिलवाये जाए। कोर्ट ने इस अर्जी पर सीबीआई से जवाब 28 मई तक जवाब मांगा है।