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चालकों को राहत: अगर गलत चालान कटा तो आला अफसरों के पास हो सकेगी सुनवाई, परिवहन विभाग ने लिया फैसला

Tue, 11 Aug 2026 07:24 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

ट्रैफिक या पुलिस चालान पर असहमति रखने वाले वाहन चालकों को राहत मिली है। अब वे गलत चालान या कार्रवाई पर निर्धारित वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकेंगे।  परिवहन विभाग ने चालान मामलों की सुनवाई के लिए अधिकारियों की रैंक के आधार पर निवारण प्राधिकारी तय किए हैं।
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हिमाचल परिवहन विभाग । - फोटो : संवाद
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विस्तार
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 हिमाचल प्रदेश में ट्रैफिक या पुलिस चालान पर असहमति रखने वाले वाहन चालकों को राहत मिली है। अब वे गलत चालान या कार्रवाई पर निर्धारित वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकेंगे। परिवहन विभाग ने चालान मामलों की सुनवाई के लिए अधिकारियों की रैंक के आधार पर निवारण प्राधिकारी तय किए हैं। प्रदेश सरकार ने यह व्यवस्था राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से जारी की है। नई व्यवस्था में चालान काटने वाले अधिकारी से वरिष्ठ अधिकारी आपत्ति पर सुनवाई करेगा। इंस्पेक्टर स्तर तक के चालान पर पुलिस उपाधीक्षक निवारण प्राधिकारी होंगे। पुलिस उपाधीक्षक या अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के चालान पर पुलिस अधीक्षक सुनवाई करेंगे। पुलिस अधीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्तर के चालान पर पुलिस उपमहानिरीक्षक सुनवाई करेंगे। पुलिस उपमहानिरीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक या अपर पुलिस महानिदेशक स्तर के चालान पर पुलिस महानिदेशक निवारण प्राधिकारी होंगे। पुलिस महानिदेशक स्तर के चालान पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) या प्रधान सचिव (गृह) सुनवाई करेंगे। यह व्यवस्था जवाबदेही का एक स्पष्ट चैनल बनाएगी।

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चालान संबंधी अपीलों का निपटारा केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 के तहत होगा। निवारण प्राधिकारी को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना होगा। शिकायतकर्ता को अपनी बात रखने का उचित अवसर दिया जाएगा। अधिकारी को कारणों सहित लिखित और तर्कसंगत आदेश देना होगा। चालान और शिकायत से संबंधित भौतिक तथा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएंगे। इससे भविष्य में जांच के लिए पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। नई व्यवस्था का सीधा लाभ उन चालकों को मिलेगा जो चालान कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। यदि चालक को लगता है कि चालान गलत तथ्यों पर आधारित है, तो वह आपत्ति दर्ज करा सकता है। किस अधिकारी के पास जाना है, यह स्तर अब स्पष्ट कर दिया गया है। इससे शिकायतकर्ता को संबंधित कार्यालय की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा। यह व्यवस्था कोर्ट जाने से पहले प्रशासनिक स्तर पर शिकायत निवारण का मंच देती है।
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