अब इसकी पहली फसल भी आने वाली है। बखोल गांव के प्रगतिशील बागवान संजीव चौहान ने कहा कि उनके पास भी सेब की यह किस्म आ चुकी है। उन्होंने कुछ बागवानों से इसकी साइनवुड प्राप्त की।
कुछ प्रगतिशील बागवानों ने इसके पौधे ट्रायल के लिए यूरोप से मंगवाए हैं। इसकी कलमें कर अब इस किस्म के कई पेड़ तैयार कर लिए गए हैं। इस सीजन में उम्मीद है कि इस पर फ ल भी उग आएंगे। उन्होंने कहा कि यह किस्म आने वाले वक्त में बड़े स्तर पर उगाई जाएगी।
‘विदेशों से मंगवाई जा रही अन्य किस्मों की तरह ही अगर सेब बागवानों ने यह किस्म मंगवाई है तो ठीक है। बागवान शौक के लिए इस किस्म को उगा सकते हैं, मगर ये उपयोगी होगी कि नहीं। भारत की मंडियों में इस सेब के उतरने से पहले कुछ नहीं कहा जा सकता है। भारत के ज्यादातर लोग दवा के नाम पर फलों को कम खाते हैं।
वे तो बस फल समझकर ही खाते हैं। यहां वही सेब किस्म ज्यादा चलती है जो लोगों में प्रचलित हो। ऐसे में रेड डिलिशियस किस्में ही ज्यादा चलन में हैं। देखना होगा कि रेड लव किस्म मार्केट में कितनी खरी उतरती है।’ - डा. विजय सिंह ठाकुर, उद्यान वैज्ञानिक एवं पूर्व कुलपति, डा. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी।