राजधानी शिमला के पीटरहाफ में हाल ही में आयोजित हिमालयी राज्यों के कनक्लेव में प्रमुख वक्ताओं के विचार मंथन के बाद एक अहम बात यह उभर कर सामने आई कि पहाड़ों में दस मेगावाट तक के बिजली प्रोजेक्ट बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
पहाड़ों में भले ही बड़े पन बिजली प्रोजेक्ट तैयार कर दिए गए हैं, लेकिन इससे पर्यावरण पर भी विपरीत असर पड़ रहा है और साथ ही लोगों को अपनी जमीन और खेतों से बेदखल होना पड़ रहा है।
पहाड़ों में छोटे बिजली प्रोजेक्टों की पैरवी इसलिए की जा रही है, क्योंकि इनसे पहाड़ों के ज्यादा लोगों को विस्थापित नहीं होना पड़ेगा और न ही पहाड़ों के पर्यावरण को नुकसान उठाना पड़ेगा। जम्मू-कश्मीर के वन सचिव मनोज द्विवेदी ने कहा कि पहाड़ों की चुनौतियां और समस्याएं समान हैं।
इसलिए छोटे बिजली प्रोजेक्टों पर ध्यान देना चाहिए। जहां तक संभव हो दस मेगावाट से नीचे की क्षमता वाले बिजली प्रोजेक्टों का निर्माण पहाड़ों में हो। इससे पहाड़ों में भूस्खलन, बाढ़ और अन्य समस्याओं से भी निजात मिलेगी।
उन्होंने सुझाव दिया कि पहाड़ों में लघु बिजली परियोजनाओं पर ध्यान देना जरूरी है। इस दिशा में उत्तराखंड के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ने लघु प्रोजेक्टों को बढ़ावा दिया था।