धर्मशाला में इनवेस्टर मीट के दृष्टिगत हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को लेकर सरकार शीघ्र समीक्षा करेगी ताकि इन इलाकों में खाली प्लॉटों में भी उद्योग स्थापित किए जा सकें। सरकार पता लगाएगी कि राज्य के इन औद्योगिक क्षेत्रों में प्लॉट क्यों खाली रहे और पूंजीपतियों को क्यों आकर्षित नहीं किया जा सका।
सरकार यह भी पता लगाने में जुटी है कि आखिर वह क्या कारण रहे जो औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगपतियों ने खाली प्लॉट होने के बाद भी क्यों रुचि नहीं दिखाई है? राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में अभी तक कितने प्लॉट खाली पड़े हैं, यह जानकारी भी उद्योग विभाग के अधिकारियों से ली जाएगी।
बताते हैं कि राज्य के अधिकांश औद्योगिक क्षेत्रों में कई प्लॉट खाली पड़े हैं। इनमें अभी तक कोई न कोई उद्योग स्थापित हो जाने चाहिए थे। अभी तक सरकार के पास ऐसा कोई आंकड़ा भी मौजूद नहीं है कि किन औद्योगिक क्षेत्रों में कितने प्लॉट खाली हैं। यह आंकड़ा सरकार जुटा रही है और इसके बाद ही सरकार अगली कार्रवाई कर पाएगी।
हैरानी की बात तो यह है कि नए औद्योगिक क्षेत्र ऐसे भी है, जो सरकार ने घोषित तो कर दिए थे परंतु यहं प्लाट बनाकर उद्योगों को आमंत्रित नहीं किया जा सका। ऊना, सिरमौर, शिमला के औद्योगिक क्षेत्रों में कई प्लॉट खाली रह गए हैं।
उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा कि सरकार राज्य के सभी औद्योगिक क्षेत्रों की समीक्षा कर रही है। सरकार यह पता लगा रही है कि औद्योगिक क्षेत्रों में कितने प्लॉट खाली हैं। ये प्लॉट उद्योगपतियों को क्यों अलॉट नहीं कि ए जा सके। अगर इन प्लॉटों तक रास्ते नहीं हैं या फिर अन्य कोई तकनीकी समस्या है तो इसे दूर किया जाएगा।