निगम से सेवानिवृत्त हो चुके मुलाजिम 8 करोड़ की ग्रेच्यूटी की इंतजार में निगम प्रबंधन पर टकटकी लगाए हैं। जबकि ग्रेच्यूटी की राशि का भुगतान निगम के रिटायर कर्मचारियों को तत्काल करना होता है।
इसके अलावा निगम के दिल्ली स्थित हिमाचल भवन और हिमाचल सदन को सरकार ने पांच करोड़ का भुगतान करना है। बताते हैं कि हिमाचल भवन और सदन को सरकार ने करीब 12 करोड़ की राशि की भुगतान करना था और इसमें से आधी राशि जारी कर दी गई है और 5 करोड़ की राशि अभी भी खड़ी है।
इसके अतिरिक्त लीव इन-केशमेंट की 1.5 करोड़ की राशि का भुगतान भी कर्मचारियों को अभी तक नहीं हो पाया है। हैरानी की बात यह है कि राज्य सरकार यह अभी तक नहीं समझ पाई है कि एचपीटीडीसी कमजोर वित्तीय स्थिति के चलते कैसे उपाध्यक्ष की ताजपोशी के बाद इस खर्चे का बोझ सहन कर पाएगी?