प्रदेश भर के राशन डिपोधारक और सरकारी सभाओं के विक्रेताओं ने कांगड़ा के पास इच्छी गांव में एकजुट होकर अपनी समस्याओं को लेकर सरकार के समक्ष आवाज बुलंद की। इच्छी में प्रदेश के राशन डिपो धारक और सरकारी सभाओं ने बैठक की।
डिपोधारकों ने कहा कि एपीएल के राशन पर उन्हें मात्र तीन प्रतिशत कमीशन मिल रहा है। निजी डिपोधारकों को दुकान किराए पर लेनी पड़ती हैं। डिपोधारक का जितना कमीशन बनता है, उतना दुकान का किराया बन जाता है।
सहकारी सभाएं भी अपने विक्रेताओं को सेवा नियमों के तहत वेतन न देकर मनमानी करती हैं। कहीं-कहीं तो सभाएं अपने विक्रेताओं को मात्र 400 रुपये मासिक वेतन दे रही हैं। हिमाचल के डिपो धारकों को भी केरल व जम्मू कश्मीर की तर्ज पर सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए।
प्रदेश में 4925 डिपो धारक हैं। इनमें 69 डिपो खाद्य आपूर्ति निगम के हैं। जो डिपोधारक आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं, वे केवल 4856 हैं। डिपोधारकों को बारदाना मुफ्त देने के निर्देश जारी होने चाहिए।
निजी डिपो धारक व सरकारी सभाओं के विक्रेताओं का वर्ष 2013 से 2017 तक 27 महीनों का कमीशन केंद्र सरकार के पास लंबित पड़ा है। केंद्र सरकार के पास राज्य सरकार हमारा पक्ष रखकर कमीशन दिलाए। डिपो धारकों को दी गई मशीनों में 4जी नेटवर्क सुविधा दी जाए।
डिपो धारक संघ के प्रदेशाध्यक्ष अशोक कुमार, रामपाल प्रदेश सचिव, रमेश चंद संयुक्त सचिव, सतविंदा उपाध्यक्ष, केहर सिंह गांधी कोषाध्यक्ष, उधम सिंह इच्छी, बलदेव सिंह सहौड़ा, जगदीश वीरता, कृष्ण चंद कांगड़ा आदि ने कहा कि यदि सरकार ने उनके लिए नीति नहीं बनाई तो लोकसभा चुनावों का बहिष्कार किया जाएगा।