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स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट लागू करे केंद्र सरकार: माकपा

Fri, 29 Sep 2017 06:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य सचिव मंडल ने प्रदेश में किसानों पर गहराते कृषि संकट और उसके प्रभाव पर गहरी चिंता जताई है। पार्टी नेता राकेश सिंघा ने कहा है कि जो किसान फल और सब्जियों का उत्पादन करते हैं वह इस संकट से पूरी तरह प्रभावित हैं। 
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राज्य और केंद्र की सरकारें इस संकट का समाधान करने के बजाय ऐसी नीतियां लागू कर रही हैं, जिससे यह संकट और भी सघन हो रहा है। जीएसटी लागू करने और पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि ने राज्य के किसानों की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी है।

पार्टी नेता संजय चौहान ने कहा कि पार्टी चुनाव से पहले स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट को लागू करने की बात करने वाले प्रधानमंत्री की ओर से अभी तक रिपोर्ट को लागू न करने की निंदा करती है। 
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प्रधानमंत्री को अब बताना चाहिए कि उन्होंने चुनावों के दौरान सेब पर आयात शुल्क घटाने का वायदा किया था, अब उसे क्यों नहीं पूरा किया जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि सीपीआई (एम) का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रदेश में बढ़ रही सेब आर्थिकी का गला घोंट रही हैं। भविष्य में इन नीतियों की वजह से आर्थिकी में गिरावट की संभावना है।

उन्होंने कहा कि आढ़ती एपीएमसी से सांठगांठ कर कृषि और बागवानी उत्पाद विपणन कानून 2005 की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। किसानों से तय मजदूरी के स्थान पर ओवर चार्ज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू नहीं किया गया तो प्रदेश भर में प्रदर्शन किए जाएंगे। 

पार्टी नेता कुलदीप सिंह तंवर ने बताया कि एक अनुमानित सर्वे के अनुसार राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न फसलों के उत्पादन की लागत में 22 से 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

सरकारों की वैकल्पिक साधनों के निर्माण में असफलता के कारण किसानों को परिवहन के जरिये अपने उत्पादों को बाजार में पहुंचाना पड़ता है जो पूरी तरह डीजल पर निर्भर है।
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