हिमाचल प्रदेश के सभी संसाधनों पर भारत सरकार का कब्जा है। बावजूद इसके भारत सरकार हिमाचल प्रदेश के हक का पैसा उसे नहीं दे रही है। आलम यह है कि हिमाचल अब बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है। यह बात नाहन में सीपीआईएम की बैठक के बाद पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि जब से प्रदेश का गठन हुआ है, यह संकट हिमाचल पर शुरुआत से ही है। हिमाचल राज्य बना तो यह परिकल्पना की गई कि इस प्रदेश का विकास केंद्र की मदद के बिना असंभव है।
उन्होंने कहा कि हर आंकडे इस बात का गवाह हैं। उन्होंने कहा कि हर साल हिमाचल की आय में जो घाटा रहता था उसे केंद्र सरकार की तरफ से राजस्व घाटा अनुदान से पूरा किया जाता था। उन्होंने कहा कि इस बार प्रदेश को जो ग्रांट इस दिशा में मिलने वाली है, वह 3000 करोड़ है लेकिन प्रदेश की मासिक देनदारियां 26,000 करोड़ हैं। उन्होंने दौरान किसानों से उनकी जमीनों के कब्जे खाली कराए जाने के मामले में भी कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि यदि किसानों के कब्जों को खाली करवाया जाएगा तो प्रदेश स्तर पर 28 अप्रैल से आंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को उनके हक से वंचित नहीं होने दिया जाएगा।