1995 से 2000 तक सोलन नगर परिषद के अध्यक्ष पद पर रहने के बाद विधानसभा में पहली पारी 2000 में शुरू की। उप चुनाव जीतते ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दायित्व मिल गया। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में कुशल प्रबंधक के तौर पर पहचान रखने वाले बिंदल का जन्म उत्तर भारत के नामी वैद्य व समाजसेवी बाल मुकुंद के घर 12 जनवरी 1955 को हुआ।
आदिवासी इलाकों में रहे प्रचारक
डॉ. बिंदल ने संघ के प्रचारक के रूप में आदिवासी क्षेत्रों में भी कार्य करने का निर्णय लिया था। करीब ढाई साल तक झारखंड में ही निशुल्क चिकित्सालय का नेतृत्व करते रहे। डॉ. राजीव बिंदल ने 1975 में इमरजेंसी के दौरान जेल भी भुगती। 1983 में पैतृक शहर सोलन में चिकित्सा कार्य शुरू किया। 1995 में पहली बार राजनीतिक जीवन में कदम रखा।
पांच साल तक नगर परिषद अध्यक्ष रहने के बाद 2000 में उप चुनाव जीता। 2003 में सोलन हलके से दूसरी बार विधायक बने। 2007 में चुनाव जीतने की हैट्रिक बना ली। डि-लिमिटेशन के बाद चुनाव क्षेत्र बदलकर उन्हें नाहन से मैदान में उतारा गया। 2017 में नाहन से दूसरी बार चुनाव जीत गए। संगठनात्मक कौशल व अनुभव की वजह से पार्टी ने उन्हें हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर चुनाव में कई बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी।