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Rajeev Bindal: यूरिया सब्सिडी योजना जारी रहेगी, किसानों को खरीद के लिए अतिरिक्त खर्च करने की आवश्यकता नहीं

Fri, 30 Jun 2023 07:26 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

बिंदल ने कहा कि मोदी सरकार के इस निर्णय से किसानों को यूरिया की खरीद के लिए अतिरिक्त खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी और इससे इनपुट लागत को कम करने में भी मदद मिलेगी। 
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भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों को करों और नीम कोटिंग शुल्कों को छोड़कर 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम की बोरी की समान कीमत पर यूरिया सब्सिडी योजना को जारी रखने की मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि पैकेज में तीन साल (2022-23 से 2024-25) के लिए यूरिया सब्सिडी को लेकर लगभग 3.70 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है। यह पैकेज हाल ही में अनुमोदित 2023-24 के खरीफ मौसम के लिए 38,000 करोड़ रुपये की पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) के अतिरिक्त है।

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बिंदल ने कहा कि मोदी सरकार के इस निर्णय से किसानों को यूरिया की खरीद के लिए अतिरिक्त खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी और इससे इनपुट लागत को कम करने में भी मदद मिलेगी। वर्तमान नीम कोटिंग शुल्क और लागू करों को छोड़कर यूरिया की एमआरपी 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम यूरिया की बोरी है, जबकि बैग की वास्तविक कीमत लगभग 2200 रुपये है। यूरिया सब्सिडी योजना के जारी रहने से यूरिया का स्वदेशी उत्पादन भी अधिकतम होगा। किसानों की सुरक्षा के प्रयास में भारत सरकार ने उर्वरक सब्सिडी को 2014-15 में 73,067 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2022-23 में 2,54,799 करोड़ रुपये कर दिया है।

मोदी सरकार ने 2025-26 तक 195 एलएमटी पारंपरिक यूरिया के बराबर 44 करोड़ बोतलों की उत्पादन क्षमता वाले आठ नैनो यूरिया संयंत्र चालू करने का निर्णय लिया है। वर्ष 2018 से 6 यूरिया उत्पादन यूनिट, चंबल फर्टिलाइजर लिमिटेड, कोटा राजस्थान, मैटिक्स लिमिटेड पानागढ़, पश्चिम बंगाल, रामागुंडम-तेलंगाना, गोरखपुर-उत्तर प्रदेश, सिंदरी-झारखंड और बरौनी-बिहार की स्थापना और पुनरुद्धार से देश को यूरिया उत्पादन और उपलब्धता के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल रही है। यूरिया का स्वदेशी उत्पादन 2014-15 के 225 एलएमटी के स्तर से बढ़कर 2021-22 के दौरान 250 एलएमटी हो गया है। 2022-23 में उत्पादन क्षमता बढ़कर 284 एलएमटी हो गई है। नैनो यूरिया संयंत्र के साथ मिलकर ये यूनिटें यूरिया में हमारी वर्तमान आयात पर निर्भरता को कम करेंगी और 2025-26 तक हम आत्मनिर्भर बन जाएंगे।

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