22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए रघुनाथ की नगरी भी राममय हो गई है। लोगों में प्रतिष्ठा को लेकर खासा उत्साह है। प्राण प्रतिष्ठा के लिए भगवान रघुनाथ को भी निमंत्रण मिला है। भगवान रघुनाथ की ओर से मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह इसमें धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेंगे। वह रघुनाथ की ओर से चांदी का चौउंर भेंट करेंगे। चौउंर देवी-देवताओं की पूजा-पाठ व आरती के समय इस्तेमाल किया जाता है।
चौउंर देवी-देवताओं का एक अहम निशान होता है और इसे पवित्र माना जाता है। जिला कुल्लू के साथ प्रदेश में सभी देवताओं के पास यह निशान जरूर होता है। इसके बिना देवी-देवताओं की पूजा व आरती अधूरी मानी जाती है। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि राम मंदिर बनना देश के लिए सौभाग्य की बात है। उन्हें निमंत्रण मिला है और वह बहुत खुश हैं। कहा कि वह 18 जनवरी को कुल्लू से रवाना होंगे। रघुनाथ की ओर से चांदी का चौउंर भेंट किया जाएगा। बता दें कि भगवान रघुनाथ की मूर्ति को 1650 में अयोध्या से लाया गया है। इसी मूर्ति की वजह से कुल्लू का अयोध्या से 374 साल पुराना व अटूट रिश्ता जुड़ा है।
क्या होता है चौउंरचौउंर याक (चुरू) की पूंछ के बालों का बना होता है। यह सफेद रंग का होता है और देवी-देवताओं की पूजा-पाठ व आरती के समय इसका प्रयोग किया जाता है। यह हर देवी देवता के पास रहता है। इससे सकारात्मक संदेश मिलता है और बुराइयों को भगाया जाता है
। -दोत राम ठाकुर अध्यक्ष जिला देवी देवता कारदार संघ