राज्य में सबसे बड़े और अधिक सरकारी स्कूलों वाले जिले को शास्त्री अध्यापकों की भर्ती में शिक्षकों का कोटा कम मिला है, जबकि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह जिला मंडी और राजधानी शिमला में शिक्षकों को भर्ती के बाद अधिक शास्त्री अध्यापक मिलेंगे। कांगड़ा को कम शास्त्री अध्यापक मिलने से यहां भर्ती के बाद भी शिक्षकों की कमी रहेगी। शिक्षा विभाग ने शास्त्री अध्यापकों की भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कांगड़ा जिला में उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं को मिलाकर करीब साढ़े पांच सौ सरकारी स्कूल हैं, जबकि शास्त्री अध्यापकों की भर्ती में जिला को केवल 51 शिक्षक मिलेंगे। वहीं करीब सवा चार सौ सरकारी स्कूलों वाले मंडी जिला को 86 और करीब चार सौ सरकारी स्कूलों वाले शिमला को 81 शास्त्री अध्यापक मिलेंगे।
इसके अलावा बिलासपुर के डेढ़ सौ और चंबा के करीब ढाई सौ स्कूलों को 30-30, हमीरपुर के डेढ़ सौ स्कूलों को 14, कुल्लू के डेढ़ सौ स्कूलों को 18, किन्नौर के करीब 50 स्कूलों को चार, लाहौल-स्पीति के 50 से कम स्कूलों को दो शास्त्री अध्यापक मिलेंगे। इसके अलावा सिरमौर के करीब डेढ़ सौ स्कूलों को पांच, सोलन के पौने दो सौ स्कूलों को 34 और ऊना के पौने दो सौ स्कूलों को 20 शास्त्री अध्यापक मिलेंगे।
उधर, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा कांगड़ा राजकुमार ने बताया कि शास्त्री अध्यापकों की वेकेंट रिपोर्ट में अधिक अध्यापकों की डिमांड भेजी गई थी, लेकिन डिमांड से कम अध्यापक मिले हैं। अध्यापकों की अलॉटमेंट निदेशालय स्तर पर ही होती है।