वहीं, अग्निहोत्री बोले कि 69 एनएच के लिए 65 हजार करोड़ रुपये के बजट की घोषणा महज जुमला ही है। बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान ये मामला खुद हरोली के विधायक एवं विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने उठाया।
उन्होंने सवाल पूछा कि गत तीन वर्षों में प्रदेश को कितने राष्ट्रीय राजमार्ग केंद्र सरकार की ओर से मंजूर किए गए हैं। इन पर कितनी धनराशि खर्च की गई और केंद्र से कितना बजट प्राप्त हुआ है।
उन्होंने ये भी पूछा कि इनकी डीपीआर कब तक बना दी जाएगी और इनके निर्माण के लिए क्या समय-सीमा निर्धारित है? इसके जवाब में सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि गत तीन साल में हिमाचल के लिए सैद्धांतिक रूप से तीन एनएच स्वीकृत किए गए हैं।
69 राजमार्गों को केंद्र सरकार की ओर से मंजूर किया गया है। डीपीआर बनने के बाद ही इन पर खर्च होने वाली धनराशि निर्धारित होगी? भारत सरकार की ओर से सैद्धांतिक तौर पर मंजूर राष्ट्रीय राजमार्गों की डीपीआर बनाने के लिए 270 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत होगी।
इस पर मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि 4200 किलोमीटर के ये एनएच लगता है आगामी 50 साल में भी नहीं बनेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो हिसाब ये लोग हमसे मांग रहे हैं, उस बारे में बता देते हैं कि घोषणा के बाद से डेढ़ साल का कार्यकाल इनका भी रहा।
अगर कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में डीपीआर बना ली होती तो जमीन पर काम करने की स्थिति में होते। 69 डीपीआर को बनाने का काम आउटसोर्स किया गया है। 31 मार्च तक 43 डीपीआर को आउटसोर्स करके बनाया जाना है।
ऊना के कांग्रेस विधायक सतपाल सिंह रायजादा ने कहा कि ऊना से ब्योली-बड़सर सड़क को एनएच बनाने की घोषणा हुई है, मगर इसकी हालत खराब है। इसके लिए एनएच बनाए जाने से पहले विधायक प्राथमिकता से बजट का प्रबंध किया जाए।
इस पर सीएम ने जल्दी से काम शुरू करने का आश्वासन दिया। कांग्रेस विधायक हर्षवर्द्धन ने कहा कि ये चुनावी स्टंट है। भविष्य के गर्भ की बातें हो रही हैं। इस पर सीएम जयराम बोले - डिलीवरी हो जाएगी, आप देखते रहें।
हिमाचल प्रदेश में सड़कों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए शिलाई से कांग्रेस के विधायक हर्षवर्द्धन चौहान ने सदन में अमर उजाला समाचार पत्र दिखाया। उन्होंने अमर उजाला में बुधवार को ही छपी खबर ‘सड़कों की घटिया मैटलिंग पर अफसरों से मांगा शपथपत्र’ का जिक्र करते हुए हर्षवर्द्धन चौहान ने कहा कि प्रदेश में सड़कों की स्थिति सही नहीं है।
जो काम सरकार को करना चाहिए, वह हाईकोर्ट कर रहा है। लोक निर्माण विभाग पर लाए गए कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान हर्षवर्द्धन चौहान ने सदन में जानकारी दी कि प्रदेश हाईकोर्ट ने कसौली सर्कल के तहत आने वाली सड़कों की लोक निर्माण विभाग की ओर से करवाई गई घटिया मेटलिंग पर जनवरी
2016 से लेकर दिसंबर 2017 तक यहां पर तैनात रहे अधिकारियों से शपथ पत्र मांगे हैं। उन्होंने कहा कि सड़कों की मरम्मत से जुड़ी ऐसी-ऐसी घटनाएं अकसर होती हैं। ऐसे में ठेेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोर नेटवर्क को मजबूत किए जाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री के पास लोक निर्माण विभाग है। उनके पास काम ज्यादा होने के कारण इस विभाग को देखने का समय नहीं होता। वे भी इस विभाग पर ध्यान दें।