विधानसभा में वीरवार को पौधरोपण मामले पर खूब बहस हुई। सत्ता पक्ष को घेरने के लिए कांग्रेस विधायक ने भी एक के बाद एक सवाल दागे। हालांकि, प्रश्न भाजपा विधायकों का था, लेकिन पूर्व कांग्रेस सरकार के मंत्री रामलाल ठाकुर और सीपीएम विधायक राकेश सिंघा ने भी अनुपूरक प्रश्न कर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
इनका कहना था कि पौधरोपण और नर्सरी के लिए जितना पैसा मिला है, अगर यह सही मायने पर खर्च हुआ होता तो जंगल में पौधरोपण की आवश्यकता नहीं होनी थी। वन मंत्री गोविंद ठाकुर ने जवाब में कहा कि पीछे क्या क्या हुआ है, इसका रिकॉर्ड देखा जा रहा है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
घटिया कार्य होने पर अधिकारी नपेंगे। पांच साल तक अफसरों को पौधों की देखरेख करनी होगी। अगर पौधा सूखता है तो इसमें भी अधिकारी नपेंगे। प्रदेश में 728 नर्ससियों के लिए मजदूरों को 15 -15 दिनों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों को पौधरोपण में शामिल किया जाएगा। प्लांटेशन को केंद्र सरकार की ई ग्रीन वेबसाइट पर भी डाला जाएगा। हिमाचल के 45 डिविजन में जहां नर्सरी का काम अच्छा होगा, वहां के अधिकारियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।
पंचायत से लेकर महिला मंडल तक जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। पांवटा के विधायक सुखराम की ओर से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा कि उनके क्षेत्र में पौधरोपण पर खर्च की गई राशि की जांच होगी।
भाजपा विधायक बलवीर वर्मा ने कहा कि चौपाल के लिए करोड़ों की राशि पौधरोपण के लिए आई है लेकिन यह कहां खर्च हुई है कोई पता नहीं है। इसमें भी वन मंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं।
अनुपूरक प्रश्न में पूर्व वन मंत्री व नैनादेवी के विधायक रामलाल ठाकुर ने अपने प्रश्न में कहा कि जिन लोगों का काम अच्छा नहीं था, उन्हें नर्सरी व पौधरोपण की जिम्मेदारी दे दी। एक अफसर ने कागजों में 37 लाख रुपये तक की प्लांटेशन दिखा दी थी।
दो महीने में जेल के भीतर डाल दिए वन माफिया
वन मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा कि सरकार वन माफिया को नहीं बख्शेगी। दो महीने के भीतर सरकार ने माफिया को जेल के भीतर डाल दिया है। नैनादेवी विधानसभा क्षेत्र का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि इस मामले को सरकार गंभीरता से देख रही है। माफिया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।