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हिमाचल में बनने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल, पढ़ें पूरा मामला

Tue, 11 Feb 2020 05:00 AM IST
Krishan Singh संतोष कुमार, अमर उजाला, नालागढ़ (सोलन)
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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फार्मा हब के रूप में विख्यात प्रदेश के उद्योगों में निर्मित होने वाली दवाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उद्योगों में निर्मित होने वाली दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतर पा रही हैं। साल 2019 में प्रदेश के उद्योगों में बनी 100 दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं। इनमें जनवरी माह में देशभर की फेल हुई 45 दवाओं में हिमाचल की 14 दवा, फरवरी माह में देशभर की 37 दवाओं में 13, मार्च माह में देशभर की 50 में से 19, अप्रैल माह में 29 में से 6, मई माह में 33 में से 8, जून माह में 25 में से 7, जुलाई माह में 18 में से एक, अगस्त माह में 28 में से 6, सितंबर माह में 21 में से 3, अक्टूबर माह में 35 में से 13, नवंबर माह में 37 में से 6 और दिसंबर माह में 47 में से 14 दवाएं शामिल है। वर्ष 2018 में देशभर में फेल हुई 350 दवाओं में से हिमाचल की 100 से अधिक दवाएं शामिल रहीं। 2020 के जनवरी माह में देशभर में लिए गए सैंपलों में से फेल हुई 34 दवाओं में सूबे के उद्योगों की चार दवाएं फेल हो गए हैं।

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प्रदेशभर में करीब 750 फार्मा उद्योग स्थापित हैं। इनमें से कई उद्योगों में निर्मित दवाओं पर सवाल उठते रहे हैं। सीडीएससीओ की ओर से हर माह दिए जाने वाले ड्रग अलर्ट के बाद विभाग हरकत में आता है और सैंपल फेल होने वाली दवाओं का स्टॉक उठा लिया जाता है। सीडीएससीओ ने बीते वर्ष अप्रैल से नवंबर माह के बीच में जारी हुए ड्रग अलर्ट में देशभर में 227 दवाओं फेल हुए सैंपलों में से हिमाचल में बनीं 50 दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं, जिस पर राज्य ड्रग विभाग ने इस मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए उन सभी उद्योगों के उन दवाओं के उत्पादन लाइसेंस निलंबित कर दिए, जिनके सैंपल फेल हुए है। राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह ने कहा कि दवाओं के फेल होने में वातावरण का भी असर रहता है और बददी में जल्द ही ड्रग टेस्टिंग लैब खुल जाएगी। 

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