ट्रायल कोर्ट ने सुना रखी है दो माह कैद की सजा
संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। सत्र न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत ने चेक बाउंस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट (ट्रायल कोर्ट) के दोष सिद्ध के निर्णय और सजा के आदेश को बरकरार रखा है।
अदालत ने दोषी हंसा देवी को ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित सजा को भुगतने के लिए आत्मसमर्पण करने के आदेश दिए हैं। साथ की 19 मई को ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होने को कहा है। 28 सितंबर 2024 को ट्रायल कोर्ट ने दोषी को दो महीने का कारावास और 1.50 लाख रुपये का मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। यह मामला साल 2014 में ढली स्थित गोल्फ लिंक फाइनेंस एंड रिजॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड का है। दोषी ने शिकायतकर्ता कंपनी से एक लाख रुपये का ऋण लिया था। समझौते के मुताबिक दोषी इस राशि का भुगतान करने में विफल रहा तो देनदारी को चुकाने के लिए उसने 1,22,600 रुपये की राशि का एक चेक जारी किया। यह चेक 30 जनवरी 2015 को हंसा के खाते में धन न होने के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद 11 मार्च 2015 को कर्ज न चुकाने पर शिकायतकर्ता ने अदालत के समक्ष केस दायर किया था। सबूतों के आधार पर हंसा देवी को दो महीने की सजा और 1,50,000 रुपये का मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। साथ ही मुआवजे का भुगतान न करने की स्थिति में एक महीने के लिए कारावास की सजा सुनाई थी। अब अपीलकर्ता दोषी हंसा देवी ने 28 सितंबर 2024 को ट्रायल कोर्ट के फैसले और सजा के आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती थी जिसे अब अस्वीकृत कर दिया।