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Shimla News: शहर के डिपुओं से अब दालें भी गायब, उपभोक्ता परेशान

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अभी तक मिल रही थी माश की दाल, बाजारों से महंगी दरों पर खरीदने को हुए मजबूर
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शहर के 25 हजार कार्ड धारक उपभोक्ताओं को आधा माह बीतने के बाद भी नहीं मिल रहा पूरा राशन
डिपुओं में महज आटा, चावल, चीनी और नमक ही
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर के लगभग 50 राशन डिपो इन दिनों जरूरी खाद्य वस्तुओं के संकट से जूझ रहे हैं। डिपुओं में जहां सरसों तेल, रिफाइंड पहले ही नहीं मिल रहा है। वहीं जो माश की दाल लोगों दी जा रही थी वह भी अब डिपुओं में खत्म हो गई है। लिहाजा अब उपभोक्ताओं को मजबूरन बाजारों से महंगी दरों पर तेल व दालें खरीदनी पड़ रही हैं। महंगाई के दौर में आर्थिंक तंगहाली से गुजर रहे लोगों को पेश आ रही इस परेशानी का हल सरकार भी नहीं कर पा रही है।
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राजधानी में करीब 25 हजार राशन कार्ड धारक हैं, लेकिन सितंबर का आधा महीना बीतने के बाद भी डिपुओं में पूरा राशन उपलब्ध नहीं है। जो लोग राशन लेने डिपो आ रहे हैं, उन्हें संचालकों की ओर से आटा, चावल, चीनी और नमक देकर लौटाया जा रहा है। अधूरा राशन मिलने के कारण लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी है। इसके अलाव चुनिंदा डिपो ही ऐसे हैं जहां पर सिर्फ माश की दाल (68) मिल रही है। लोगों को यह बाजारों से दोगुने दामों पर खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। रविवार को संजौली, ढली, छोटा शिमला, बस स्टैंड, लोअर बाजार, कसुम्पटी समेत आसपास के डिपुओं में राशन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी। लक्कड़ बाजार के रमेश सिंह, बस स्टैंड की अनीता अनीता वर्मा और दिलीप कुमार ने बताया कि लगातार दूसरे महीने अधूरा राशन मिला है। इससे रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। लोगों ने कहा कि अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले दिनों में लोगों को दिक्कतें झेलने को मजबूर होना पड़ेगा। उपभोक्ताओं ने सरकार से मांग की है कि राशन की आपूर्ति व्यवस्था में सुधार किया जाए और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उधर, जिला नियंत्रक खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नरेंद्र धीमान ने बताया कि दालों व तेल की खरीदारी सिविल सप्लाई कार्पोरेशन करता है। ऐसे में जब सप्लाई आएगी तो तुरंत डिपुओं में वितरित की जाएगी।
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