सूबे में ग्रांट इन एड के तहत तैनात करीब सात हजार पीटीए शिक्षकों ने सरकार ने इन्हें स्पेशल कांट्रेक्ट में शामिल करने की मांग की है। यही नहीं अनुबंध के सभी लाभ भी मांगे हैं। मंगलवार को शिमला पंचायत भवन में पीटीए टीचर एसोसिएशन की प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक मेहता ने कहा कि जून 2006 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ग्रांट इन एड के तहत 6,945 पीटीए शिक्षकों की भर्ती की। आठ साल बाद नियमित करने का आश्वासन दिया। अगस्त 2013 में पॉलिसी बनी और पीटीए शिक्षकों को कांट्रेक्ट में मर्ज करने का प्रावधान किया गया।
इस बीच जेबीटी शिक्षकों ने कोर्ट में पीटीए, पैरा और पैट शिक्षकों की नियुक्ति पर सवाल उठाए। अब इन्हें न तो अनुबंध में लिया जा सका है और न ही नियमित करने की प्रक्रि या आगे बढ़ सकी है। बैठक में विवेक मेहता के अलावा शिशुपाल गाजटा, ललित ठाकुर, प्रताप फौजी, आज्ञा राम, दिनेश ठाकुर, गगन चौहान, जयलाल, बोबिल ठाकुर, राजेश भाटा, सुनील कुमार, राहुल गौतम, किरण नेगी, अरुण कुमार, सुभाष कुमार, हरिओम कुमार, रमेश कुमार आदि मौजूद रहे।
नहीं मिल रही ग्रांट
हार्ड एरिया में कार्यरत पीटीए शिक्षकों को जुलाई के बाद ग्रांट नहीं मिली है। अन्य जिलों में दो महीने से ग्रांट जारी नहीं की गई है। इनमें हायर एजूकेशन में 10.50 करोड़ और एलीमेंटरी में करीब 16 करोड़ रुपये है। पीटीए भर्ती पर लगे आरोपों को लेकर 18 नवंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। सरकार ने अपना पक्ष रख दिया है। कोर्ट इस दिन कोई फैसला सुना सकता है।