कॉलेजों में पेरेंट्स टीचर एसोसिएशन (पीटीए) में शिक्षकों की अनिवार्यता की शर्त हटाने के बाद शिक्षकों ने कोर्ट जाने का फैसला लिया है। शिक्षक इसी सप्ताह सरकार को हाईकोर्ट में चुनौती दे रहे हैं।
सरकार ने हाल ही में पीटीए पॉलिसी में संशोधन कर पीटीए में शिक्षकों की अनिवार्यता की शर्त हटा दी है। उनकी जगह सुपरिंटेंडेंट या सीनियर असिस्टेंट को शामिल कर एसोसिएशन में सचिव बनाया जा सकता है।
पहले शिक्षकों को सचिव बनाना अनिवार्य था। सरकार ने एसोसिएशन की कार्यकारिणी में तीन अन्य शिक्षकों की सदस्यता की शर्त भी हटा दी है। अब इन तीन शिक्षकों की भी आवश्यकता नहीं रहेगी।
शिक्षक चाहें को सदस्य बन सकते हैं न चाहें तो कार्यकारिणी इन शिक्षकों के बिना ही पूरी मानी मानी जाएगी। सरकार 6 महीने में पांच बार पीटीए पॉलिसी में संशोधन कर नए आदेश जारी कर चुकी है। इससे शिक्षकों में आक्रोश है।
ऐसे होता है पीटीए का गठन
कॉलेज छात्र-छात्राओं के अभिभावक इसके सदस्य होते हैं। इसके अलावा 10 सदस्यों की एक एग्जेक्टिव काउंसिल बनती है। इसमें सचिव और तीन सदस्यों के अलावा सभी पदाधिकारी और सदस्य अभिभावकों में से होते हैं।
सभी सदस्यों से 300 से 400 सदस्यता फीस ली जाती है। यह कॉलेज के वेलफेयर के कार्यों के लिए खर्च की जाती है।