सरकारी नौकरी में एक फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर संघर्षरत हिमाचल प्रदेश दृष्टिहीन संघ ने बुधवार को राज्य विधानसभा के बाहर प्रदर्शन और रेलवे स्टेशन के पास चक्का जाम किया। दोपहर दो बजे से लेकर दो बजकर 20 मिनट तक संघ के सदस्यों ने रेलवे स्टेशन के पास मुख्य सड़क पर लेटकर प्रदर्शन किया। इस दौरान वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद रही। करीब बीस मिनट पर दृष्टिहीन संघ ने अपनी मांगों को लेकर चक्का जाम किया।
बुधवार सुबह 11 बजे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए दृष्टिहीन संघ के सदस्यों ने विधानसभा परिसर के बाहर बैठकर प्रदर्शन किया। दोपहर दो बजे संघ के सदस्य एकाएक उग्र हो गए। विधानसभा परिसर के बाहर से उठकर मुख्य सड़क की ओर चल दिए। पुलिस ने प्रदर्शन समाप्त होने की बात समझ कर मामले को हल्के में लिया। जब दृष्टिहीन संघ के सदस्य रेलवे स्टेशन के पास मुख्य सड़क पर पहुंच कर सड़क पर बैठ गए तो पुलिस हरकत में आई।
पुलिस को चक्का जाम करने वालों को उठाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। संघ के सदस्य सड़क पर ही लेट गए। संघ के अध्यक्ष शोभू राम ने मांग करते हुए कहा कि एक फीसदी आरक्षण देने के अलावा बेरोजगार दृष्टिहीनों को भी बसों में सफर करने के लिए निशुल्क सुविधा मिलनी चाहिए। दृष्टिहीन कोटे के तहत नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियों में हुए फर्जीवाडे़ की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा पथ परिवहन निगम और सचिवालय में फर्जीवाड़ा कर दृष्टिहीन लोगों की नौकरियों पर झूठे मेडिकल प्रमाणपत्र बनाकर कई लोगों ने नौकरियां प्राप्त की हैं। इस अवसर पर संजीव सुंटा, पंकज ठाकुर, भोला, सुनीता, नोबल और धर्मेंद्र सहित कई अन्य मौजूद रहे। उधर, पुलिस अधीक्षक शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने बताया कि 107, 51 के तहत प्रदर्शनकारियों को मौके से गिरफ्तार कर थाने ले जाया गया। पुलिस थाना जाकर उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।
चक्का जाम के बाद मुख्यमंत्री से की मुलाकात
चक्का जाम करने के बाद दृष्टिहीन संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से विधानसभा परिसर में मुलाकात की। संघ के अध्यक्ष शोभू राम ने बताया मुख्यमंत्री ने नौ अप्रैल के बाद संघ की मांगों को लेकर बैठक करने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने प्रधान सचिव अनुराधा ठाकुर को मौके पर बुलाकर मामले की जानकारी भी ली।