राज्य बिजली बोर्ड इंप्लाइज यूनियन पांच सितंबर को प्रदेश सचिवालय का घेराव करेगी।
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राज्य बिजली बोर्ड इंप्लाइज यूनियन पांच सितंबर को प्रदेश सचिवालय का घेराव करेगी। मांगों के पूरा नहीं होने पर यूनियन ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया है। यूनियन ने सचिवालय स्थित वित्त विभाग के अधिकारियों पर मुख्यमंत्री को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए वीरवार को बिजली बोर्ड प्रबंधन को विरोध प्रदर्शन करने का नोटिस भी सौंप दिया है।
यूनियन के महासचिव हीरालाल वर्मा ने बताया कि बोर्ड प्रबंधन ने तीन वर्ष पहले बोर्ड की 48 तकनीकी और अन्य श्रेणियों के वेतन को पंजाब बिजली कंपनी के बराबर लाने के लिए घटा दिया था। यह न्यायसंगत नहीं है और तथ्यों से परे है। इस कारण इन श्रेणियों के कर्मचारियों के वेतन में कटौती हुई है।
कई जगह इनके वेतन से रिकवरी की जा रही है। यदि बोर्ड प्रबंधन पंजाब बिजली कंपनी की तर्ज पर वेतन देना चाहता है तो वहां इन श्रेणियों को दिए जा रहे टाइम स्केल को भी इन 48 श्रेणियों के कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए था। उन्होंने बोर्ड प्रबंधन वर्ग से मांग करते हुए कहा कि इन कर्मचारियों के वेतन को कम करने वाले कार्यालय आदेश को तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए।
उन्होंने पदोन्नति पर बढ़ी हुई ग्रेड पे के लिए दो साल की शर्त को खत्म करने की मांग की। आरोप लगाया कि बोर्ड की 48 श्रेणियों के वेतन विसंगतियों के मामले को बिजली बोर्ड के लिए गठित सर्विस कमेटी जानबूझ कर उलझा रही है। मुख्यमंत्री की इस बारे में कई बार की गई घोषणाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खडे़ किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली बोर्ड में 800 से अधिक करुणामूलक के मामले वर्ष 2006 से लंबित हैं। बिजली बोर्ड में 30 वर्षों से विद्युत सब स्टेशनों में कई गुणा वृद्धि हुई है।
लेकिन सब स्टेशन के स्टाफ के अभाव के कारण इनको या तो ठेके पर दिया गया है या दूसरी श्रेणी के कर्मचारियों को नियुक्त कर काम कार्य चलाया जा रहा है। इन सब स्टेशनों में बोर्ड के निदेशक मंडल की ओर से 21 मार्च को 550 पदों की स्वीकृति दी गई थी। लेकिन अभी तक फाइल प्रदेश सरकार के वित्त विभाग के चक्कर ही काट रही है।