राज्य सरकार के खिलाफ 15 मई को प्रदेश के हजारों शिक्षक सड़कों पर उतरेंगे। शिक्षक संघ ने सरकार को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर दो दिन में मांगें नहीं मानी गईं तो शिक्षक धरना देने को विवश होंगे। राजकीय अध्यापक संघ ने सरकार और शिक्षा विभाग पर मांगों की अनदेखी का आरोप लगाया है। संघ के पदाधिकारियों ने प्रधान सचिव शिक्षा को सौंपे गए 17 सूत्री मांगपत्र पर जल्द फैसला लेने की मांग उठाई है।
संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा है कि शिक्षा और शिक्षकों की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वीरेंद्र चौहान, महासचिव नरेश महाजन, प्रवक्ता कैलाश ठाकुर, मुख्य संरक्षक अजित चौहान, संरक्षक अरुण गुलेरिया, उपाध्यक्ष डीपी शर्मा और महावीर कैंथला ने कहा है कि सरकार को मांगों से अवगत करवाया गया है।
संघ ने मांग की है कि गुणात्मक शिक्षा के संबंध में प्रारंभिक शिक्षा द्वारा अक्तूबर 2005 और सितंबर 2006 में जारी की गई अधिसूचनाओं की बहाली की जाए। 4-9-14 से संबंधित साल 2013, 2014 की अधिसूचनाओं को रद्द किया जाए। विवादित संशोधित ग्रेड पे पहली जनवरी 2006 से लागू की जाए।
दो साल की शर्त को हटाया जाए। अध्यापक वर्ग को एनजीओ की तर्ज पर जेसीसी का प्रावधान किया जाए। पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए। अनुबंध अध्यापकों को प्रथम नियुक्ति की तारीख से सभी लाभ दिए जाएं। शास्त्री और भाषा अध्यापकों को टीजीटी पदनाम दिया जाए। पीजीटी के स्थान पर प्रवक्ता पदनाम की बहाली की जाए।
शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 62 साल की जाए। सभी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में डीपीई के पद का प्रावधान कर इनके दोहरे वेतनमान को समाप्त किया जाए। अर्जित अवकाश को 300 दिन पूरे होने पर भी खाते में जमा करने की व्यवस्था की जाए।
एससीईआरटी का पूरा नियंत्रण स्कूल कैडर को दिया जाए। संयुक्त निदेशक स्कूल कैडर की व्यवस्था की जाए। सभी डाइट में उप शिक्षा निदेशक के पदों का सृजन किया जाए। प्रधानाचार्यों की नियमित पदोन्नति की जाए।
प्रवक्ता से मुख्याध्यापकों की पदोन्नति पर वेतन संरक्षण का प्रावधान किया जाए। पीटीए अध्यापकों को सेवा अवधि के आधार पर तत्काल नियमित किया जाए। टीजीटी से पीजीटी पदोन्नति पर विकल्प से संबंधित अप्रैल 2010 की अधिसूचना को रद्द किया जाए।