प्रदेश के हजारों किसान और बागवान 16 नवंबर को शिमला में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। हिमाचल किसान सभा, प्रदेश सेब उत्पादक संघ और किसान-बागवान यूनियन पुजारली नंबर चार रोहड़ू ने सरकार के खिलाफ संयुक्त मोर्चा खोल दिया है। तीनों संघों ने राज्य सरकार पर छोटे कब्जाधारकों को राहत न देने का आरोप लगाया है।
शुक्रवार को शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष और पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने बताया कि शिमला सब्जी मंडी में जनसभा होगी। इसके बाद रैली निकालते हुए किसान, बागवान पंचायत भवन, ओल्ड बस स्टैंड और टालैंड से सब्जी मंडी तक पहुंचेंगे।
उन्होंने वन्य संरक्षण कानून में संशोधन करने की भी मांग की है। राकेश सिंघा ने सरकार को चेताते हुए कहा कि इस प्रदर्शन के बाद भी अगर सरकार ने मांगें पूरी नहीं कीं तो मंत्रियों, सांसदों और विधायकों का घेराव किया जाएगा।
सिंघा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान 27 अगस्त को सदन में संकल्प प्रस्ताव रखा था। कहा था कि सरकार हाईकोर्ट जाकर 10 बीघा से कम कब्जे वाले लोगों पर फिलहाल कार्रवाई न करने का अनुरोध करेगी।
लघु, सीमांत किसानों, भूमिहीनों, समाज के निर्धन और पिछडे़ वर्ग के प्रति भी मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता जताई थी लेकिन अभी तक सरकार ने संकल्प प्रस्ताव पर कार्रवाई नहीं की है। 27 अगस्त के बाद भी आनी, रामपुर बुशहर के कई क्षेत्रों में पेड़ कटान हुए हैं। भवनों को तोड़ा गया है। इसे लेकर किसानों, बागवानों में रोष है।
उन्होंने इस मामले पर सरकार से नीति बनाने की मांग की है। हिमाचल किसान सभा के अध्यक्ष डा. कुलदीप तंवर ने कहा कि जंगली जानवरों के मामले पर भी सरकार का रवैया उदासीन है। सरकार ने बीते छह माह से केंद्र सरकार की ओर से भेजी गई एडवाइजरी पर काम नहीं किया है।
पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि कब्जाधारियों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने का सरकार का फैसला गलत है। साल 2002 में 1.67 लाख परिवारों ने सरकार की बातों में आकर शपथपत्र दे दिए थे। इन्हें चुनाव लड़ने से रोकना लोकतंत्र को कमजोर करने जैसा है। सरकार कांग्रेस से जुड़े कब्जाधारियों पर कार्रवाई नहीं कर रही है। पक्षपात किया जा रहा है।
राकेश सिंघा ने कहा कि 16 नवंबर को शिमला में जनसभा करने के लिए स्थल आवंटन में भी राजनीति हुई है। इसी दिन कांग्रेस का भी प्रदर्शन है। सरकार ने कांग्रेस को अंबेडकर चौक का बड़ा स्थान आवंटित किया जबकि किसान-बागवानों को सब्जी मंडी शिमला में जगह दी।