आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर, मिड-डे मील वर्कर्स और आशा वर्कर्स यूनियन (संबंधित सीटू) संयुक्त रूप से मंगलवार को विधानसभा का घेराव करेगी। वेतन बढ़ोतरी की मांग पर तीनों यूनियनों की हजारों वर्कर्स ओल्ड बस स्टैंड शिमला से विधानसभा तक रैली निकालकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। सीटू के प्रदेश अध्यक्ष जगतराम ने कहा कि सरकार लंबे समय से आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और आशा वर्कर्स की मांगें मानने को अड़ियल रवैया अपना रही है।
झूठे आश्वासन दिए जाते हैं। हिमाचल एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और आशा वर्कर्स को देश में सबसे कम वेतन मिलता है। कहा कि सरकार ने मंत्रियों, विधायकों के वेतन सहित अन्य सुविधाओं में भारी बढ़ोतरी की, लेकिन लाखों गरीब महिलाओं के वेतन में बढ़ोतरी नहीं की जा रही है। बताया कि हरियाणा में आंगनबाड़ी वर्कर्स को आठ हजार और हेल्पर को 4250 रुपये वेतन मिलता है।
हिमाचल में वर्कर्स को मात्र 3450 रुपये और हेल्पर को 1800 रुपये मिलते हैं। कई राज्यों ने पेंशन योजना लागू की है। केरल में दस हजार आंगनबाड़ी वर्कर्स को वेतन दिया जाता है। हिमाचल में मिड-डे मील वर्कर्स को मात्र एक हजार रुपये दिए जाते हैं। हरियाणा में 2500 रुपये और केरल में दस हजार मासिक वेतन दिया जाता है। ऐसा ही हाल आशा वर्कर्स का है। उन्हें मात्र एक हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता है। कहा कि साल 2014-15 के बजट में आंगनबाड़ी के वेतन में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा की गई थी, लेकिन इस घोषणा को अभी तक लागू नहीं किया गया।
वर्कर्स यूनियनों की ये हैं मांगें
आंगनबाड़ी वर्कर्स को हरियाणा की तर्ज पर 8000 रुपये और हेल्पर को 4250 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाए। मिड-डे मील और आशा वर्कर्स को 6000 रुपये वेतन दिया जाए। आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और आशा वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए, उन्हें स्थायी किया जाए। 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू किया जाए, ग्रेच्युटी और पेंशन योजना लागू की जाए। आंगनबाड़ी महिला के वेतन में साल 2014-15 के बजट में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा को लागू किया जाए, एरियर का भुगतान किया जाए।