हिमाचल में चीन से आयातित सामान का भारी विरोध शुरू हो गया है। प्रदेश के व्यापारियों ने चीनी सामान पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है। राज्य के उपभोक्ता भी चीन से आए सामान का बहिष्कार कर रहे हैं।
जल्द ही कारोबारी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के माध्यम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन देंगे, जिसमें चीन से आयात को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने की मांग उठाएंगे। राजधानी शिमला समेत पूरे हिमाचल में आम लोगों और कारोबारियों ने चीन से लाए गए सामान का विरोध करना शुरू कर दिया है।
चीनी सामान का बहिष्कार करने के लिए सामाजिक संस्थाओं और आम उपभोक्ताओं के अलावा हिमाचल के व्यापारी भी खासे सक्रिय हैं। बाजारों में चीन से आए सामान की भरमार है। खिलौनों, मोबाइल फोन समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लेकर देवी-देवताओं की मूर्तियों तक की सप्लाई चीन से हो रही है। बहुत सी वस्तुओं पर 50 फीसदी तक आयात शुल्क होने के बावजूद हमारे देश में बनी चीजों से सस्ती दरों पर मिल रही हैं।
हिमाचल प्रदेश व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह का कहना है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बाजारों में 40 से 42 फीसदी सामान विदेशों से आ रहा है। इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के माध्यम से एक पत्र भेजा जाएगा।
दूसरी ओर मुख्य सचिव वीसी फारका का कहना है कि सरकार की ओर से चीन से आयातित सामान नहीं खरीदने के लिए न तो किसी तरह के निर्देश जारी किए गए हैं और न ही किए जा सकते हैं। अगर हिमाचल में किसी तरह का बहिष्कार हो रहा होगा, तो लोग अपने स्तर पर कर रहे होंगे।
करोड़ों का चाइनीज कारोबार, न के बराबर आ रहा राजस्व
भारत और पाकिस्तान के बीच खराब माहौल में पाक से दोस्ती निभाने वाले चीन में बने सामान की बिक्री हिमाचल में भी कुछ हद तक घटी है। लेकिन चाइनीज इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का मार्केट में अब भी बोलबाला है। हिमाचल में चाइनीज उत्पादों की करोड़ों की मार्केट है। कोई विशेष पॉलिसी न होने की वजह से प्रदेश को इससे न के बराबर राजस्व मिलता है।
चाइनीज सामान को दिल्ली और हरियाणा से अवैध रूप से सूबे में पहुंचाया जा रहा है। थोक और रिटेल के साथ एमआरपी की कीमतों में भारी भिन्नता की वजह से आबकारी एवं कराधान विभाग को भी टैक्स और जुर्माना तय करने में दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। आबकारी एवं कराधान विभाग के नॉर्थ जोन फ्लाइंग स्कवायड के उप आयुक्त डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि चीन के सामान की बिक्री पर विभाग की नजर है।
इस सामान की बिक्री के लिए राज्य की कोई विशेष नीति नहीं है। थोक और रिटेल के साथ एमआरपी की कीमतों में भारी भिन्नता है जिससे टैक्स व जुर्माने की कार्रवाई में बाधा आती है। हालांकि, काफी धरपकड़ के बाद अब यह कारोबार हिमाचल में सिमटता जा रहा है।
इन चाइनीज उत्पादों पर है प्रतिबंध
चाइनीज पटाखे, प्लास्टिक के खिलौने और देसी मोबाइल सेट पर प्रतिबंध है, बावजूद इसके प्रदेश की मार्केट में यह सामान बिकता है। त्योहारी सीजन में चीन की मार्केट काफी उछाल में होती है। लेकिन इस बार चीन में बने उत्पादों की मार्केट में काफी गिरावट है। स्वीट्स, कैंडी और चॉकलेट आदि का कारोबार बेहद कम रह गया है। रेडीमेड, खिलौनों और चाइनीज फोन आदि की मार्केट अभी भी खड़ी है।