अमर उजाला एक्सक्लूसिव...
नगर निगम ने जारी की भवनमालिकों की सूची, 32 से 35 हजार पार हुआ भवनमालिकों का आंकड़ा
इनमें कई नए भवन तो सैकड़ों ऐसे जो कर रहे थे टैक्स की चोरी, निगम इस साल से करेगा वसूली
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में तीन हजार से ज्यादा भवनमालिकों को इस साल से पहली बार प्रॉपर्टी टैक्स चुकाना होगा। इनमें से कई भवन नए बने हैं। इन्हें नए फैक्टर के साथ बिल जारी होंगे। सैकड़ों भवन ऐसे भी हैं जिनके मालिक कई साल से टैक्स चोरी कर रहे थे। निगम इनसे पिछले कई साल का टैक्स ब्याज के साथ वसूलेगा।
खास बात यह है कि नगर निगम ने इस वित्तीय वर्ष के लिए शहर में भवनमालिकों की सूची सार्वजनिक कर दी है। शहरवासी नगर निगम की वेबसाइट पर ऑनलाइन इसे चेक कर सकते हैं। निगम प्रशासन के अनुसार सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की गई इस सूची की अंतिम जांच भी पूरी कर ली गई है। रिपोर्ट के अनुसार राजधानी में अब भवनमालिकों की संख्या 35 हजार के पार हो गई है। बीते साल तक कुल 32 हजार भवनमालिक नगर निगम को टैक्स दे रहे थे। निगम को अंदेशा था कि शहर में सैकड़ों भवनों के मालिक टैक्स नहीं दे रहे हैं। इसलिए भवनों का ड्रोन और डोर-ट-डोर सर्वे करवाया गया है। इस सर्वे की रिपोर्ट में शिमला शहर में 46866 भवनों की आईडी का रिकॉर्ड पता चला। यह वर्तमान भवनों की संख्या 32 हजार से करीब 14866 भवन ज्यादा था। इनमें कई पंचायती भवन भी शामिल हैं। हालांकि, जब इसकी जांच करवाई गई तो इनमें कई भवनों की डबल आईडी का पता चला। इन्हें अब रिकॉर्ड से हटाया गया है। हालांकि, इसके बावजूद तीन हजार से ज्यादा भवन स्पष्ट रूप से ऐसे मिले हैं जिनका टैक्स नगर निगम को नहीं मिल रहा है। अब निगम इस वित्तीय वर्ष से इन्हें पहली बार टैक्स के बिल जारी करने जा रहा है।
नगर निगम की बढ़ेगी आय
शहर में तीन हजार से ज्यादा नए भवनों से टैक्स मिलने से नगर निगम की आय बढ़ेगी। अभी नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स से हर साल 20 से 22 करोड़ रुपये की आय होती है। अब नए भवन मिलने और कई भवनों में टैक्स चोरी के खुलासे के बाद निगम की आय पांच करोड़ रुपये और बढ़ने की उम्मीद है।
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अभी बंद है बिल देने की प्रक्रिया
नगर निगम ने शहर में बिल जारी करने की प्रक्रिया फिलहाल रोक रखी है। अभी सिर्फ व्यावसायिक भवनों के मालिकों को ही बिल जारी किए जा रहे हैं। रिहायशी भवनों के बिल स्लैब दर की गड़बड़ी के कारण बंद हैं। इन्हें सदन में चर्चा के बाद बिल जारी करने पर फैसला लिया जा सकता है। निगम ने शहरी विकास विभाग को स्लैब दरों को दुरुस्त करने के लिए भी कहा है।
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भवनमालिकों की सूची तैयार
शहर में सर्वेक्षण के आधार पर भवनमालिकों की नई सूची तैयार हो गई है। अब शहर में करीब 35 हजार भवनमालिक हैं। जो तीन हजार नए भवन मिले हैं, उन्हें भी इस साल से टैक्स चुकाना होगा।
-डॉ. भुवन शर्मा, अतिरिक्त आयुक्त, नगर निगम शिमला