राजधानी शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम ‘फेस्टिवल ऑफ बैलेट’ के अंतिम दिन रविवार को नृत्य नाटिका ‘कर्ण’ प्रस्तुत की गई।
भारतीय कला केंद्र दिल्ली की ओर से प्रस्तुत इस नृत्य नाटिका में कलाकारों ने उड़ीसा की छाऊ शैली में नृत्य नाटिका के माध्यम से कर्ण के जीवन की विभिन्न घटनाओं का मंचन किया।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर उपस्थित हुए। नृत्य नाटिका में दिखाया गया कि कुं ती ने महर्षि दुर्वासा से वरदान मांगकर मंत्रों के उच्चारण से दिव्य कवच और कु ंडल युक्त कर्ण को जन्म दिया।
कर्ण सूत पुत्र था इसलिए द्रोणाचार्य ने उसे शिक्षा देने से इंकार कर दिया, अत: कर्ण ने परशुराम से शिक्षा प्राप्त की। कौरवोें और पांडवों के बीच युद्ध के दौरान इंद्र ने छल पूर्वक कर्ण से कवच और कुंडल मांग लिए।
जिस कारण महाभारत के युद्ध में अर्जुन के हाथों कर्ण मृत्यु को प्राप्त हुआ। नृत्य नाटिका का निर्देशन शोभा दीपक सिंह ने किया। इसके अतिरिक्त कोरियोग्राफी स्वर्गीय गुरु कृष्ण, चंद्रा नायक, शशिधरन नायर, बैलेट मास्टर राजकुमार शर्मा, संगीत वरुण गुप्ता, संवाद मनोहर सिंह, रोशनी मिलिंद श्रीवास्तव, बनी सिंह, नंद कुमार, ध्वनि रामानंद राय, परिधान, सेट स्क्रिप्ट और डांस में शोभा दीपक सिंह, मंजू कोहली और आरके पांडे ने सहयोग दिया।
नृत्य नाटिका के दौरान प्रस्तुत नृत्य में अरुण, संदीप, अजय, आरएस नेगी, गुरपाल, सुधांशु, लक्ष्मी प्रसाद, विकास, नरेंद्र कु मार, कुसुम, गरिमा, स्वर, गीता, दीपिका, सुमति, लक्ष्मी मणी, तिथि और कुसुम ने भाग लिया।