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Shimla: विदेशों में भी ऑनलाइन बिकेंगे कैदियों के बनाए उत्पाद, आजीविका मिशन के तहत मिलेगा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म

Sat, 08 Feb 2025 01:47 PM IST
शिमला ब्यूरो दीपक मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
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हिमाचल की जेलों में बंद सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों के निर्मित हस्तशिल्प उत्पादों को अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतराने की तैयारी है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन (एचपी एसआरएलएम) के तहत ऑनलाइन प्लेटफार्म मिलेगा जबकि ई-कॉमर्स कंपनी लोगों के घर पर ही इन उत्पादों की डिलीवरी करेगी।
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प्लेटफॉर्म से प्रदेश के कैदियों को एक मंच मिल पाएगा जिससे वह आसानी से अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन माध्यम से बेच पाएंगे। जेल प्रशासन की यह पहल कैदियों के उत्थान और उन्हें समाज से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। हिमाचल में कैदियों के कल्याण के लिए जेल विभाग और सुधार सेवाओं ने 2016-17 में हर हाथ को काम योजना के तहत बेकरी, टेलरिंग, वेल्डिंग, डेयरी फार्मिंग, लॉन्ड्री, कैंटीन और कार वॉशिंग सेंटर सुविधाएं शुरू की हैं। इसके बाद से कैदियों को उनकी योग्यता और रुचि के आधार पर काम सिखाया जाता है।

मौजूदा समय में प्रदेश की सेंट्रल जेल कंडा, धर्मशाला, नाहन, कैथू सहित अन्य जेलों में करीब 200 महिला सहित पुरुष कैदी इन उद्योग से जुड़े हुए हैं। इनके विभिन्न उत्पादों को हिमकारा ब्रांड के तहत हिमकारा स्टोर के माध्यम से बेचा जा रहा है। अब कैदियों के हुनर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए एसआरएलएम के तहत ऑनलाइन जानी मानी ई-कॉमर्स कंपनी ब्लू डार्ट के साथ करार करने की भी तैयारी चल रही है। ऐसा होने पर देश-विदेश के ग्राहकों को घर पर ही इन उत्पादों की ऑनलाइन डिलीवरी मिलेगी। लोग कैदियों के हुनर से बने उत्पादों को आसानी से खरीद सकेंगे। इससे जेलों में तैयार कैदियों के उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल कैदियों को उनकी कमाई का भी एक अच्छा जरिया बनेगा। खास बात है कि मार्केट रेट से कम इन उत्पादों को केंद्र सरकार ने हैंडलूम मार्क प्रदान किया है।
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कैदियों को जेल में रहने के दौरान रचनात्मक और आय उत्पादक गतिविधियों में शामिल करके सुधारा जा रहा है। इससे उन्हें समय का उपयोग करने, नए कौशल सीखने और रिहा होने के बाद आजीविका कमाने का मौका मिलता है। जेलों में तैयार किए उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच को सुविधाजनक बनाने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाले समय में उत्पादों की ऑनलाइन डिलीवरी सुविधा भी मिलेगी- एसआर ओझा, महानिदेशक, हिमाचल कारागार एवं सुधार सेवाएं।
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अब तक 33.35 करोड़ का कारोबार
हिमकारा उन्नयन समिति के अधीन इन सभी उद्यमों को व्यवस्थित रूप से क्रियान्वित किया रहा है। साल 2016-17 से लेकर 2024 तक 4603 कैदियों को 11.50 करोड़ रुपये का वेतन दिया है। इसके अलावा जेल प्रशासन का टर्नओवर (कारोबार) करीब 33.35 करोड़ रुपये रहा है।
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