बिलासपुर की बिरोजा एवं तारपीन फैक्ट्री
पिछले आठ माह से बंद पड़ी बिलासपुर की बिरोजा एवं तारपीन फैक्ट्री में अब प्रोडक्शन शुरू हो गया है। पहले तीन करोड़ से ज्यादा कीमत के तारपीन का उपलब्ध स्टॉक और फिर मार्च से लॉकडाउन के कारण बिरोजा फैक्टरी में उत्पादन ठप था। जून में तारपीन तेल स्टॉक को मार्केट मिलने के बाद प्रबंधन ने कोरोना संक्रमण से मजदूरों की सुरक्षा की तमाम व्यवस्थाओं के साथ फैक्ट्री में उत्पादन शुरू कर दिया है। अभी दो शिफ्टों में काम चलाया जा रहा है। निकट भविष्य में जरूरी आवश्यकताएं पूरी होने पर फैक्ट्री को तीन शिफ्टों में चलाने की योजना है। इसके लिए प्रबंधन ने आला अधिकारियों को लिखा है।
तीन करोड़ से ज्यादा के तारपीन को मार्केट न मिलने से अक्तूबर 2019 से फैक्ट्री में उत्पादन ठप था। तारपीन तेल को बनाए स्टोर फुल हो गए थे। मार्च माह में कोरोना संक्रमण फैलने से संकट पैदा हुआ। ऐसे में न प्रोडक्शन हुआ और न ही सेल। जून में तारपीन तेल उठना शुरू हुआ। इससे स्टोर खाली हो गए और फैक्टरी में प्रोडक्शन शुरू हो गया। फैक्ट्री तीन शिफ्टों में चलाने को प्रबंधन के लिए मंझे हुए कारीगरों की जरूरत है। फिलवक्त, काम चलाने को कम से कम एक ब्वॉयलर ऑपरेटर और डिस्टिलर की जरूरत है। प्रबंधन ने आला अधिकारियों को पत्र लिखा है।
हरी झंडी मिलने के बाद प्रबंधन कर्मचारियों की तैनाती प्रक्रिया शुरू करेगा। उधर, फैक्टरी के महाप्रबंधक ने माना कि आठ महीने के बाद फैक्टरी को शुरू किया गया है। इस बीच फैक्टरी भवन सहित अन्य मेंटिनेंस वर्कस व रोड की हालत को सुधारा गया है। बिरोजा एवं तारपीन फैक्टरी को तीन शिफ्टों में शुरू करने की योजना है। आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति के लिए आला अधिकारियों को पत्र लिखा है। -सुकल्प शर्मा, महाप्रबंधक, बिरोजा एवं तारपीन फैक्ट्री, बिलासपुर
यह है फैक्ट्री में बिरोजा एवं तारपीन तेल की स्टोरेज क्षमता
बिलासपुर की बिरोजा एवं तारपीन फैक्ट्री में 2.40 लाख लीटर तारपीन तेल स्टोरेज की क्षमता है। 20 हजार क्विंटल पक्का बिरोजा स्टोर किया जा सकता है। प्रत्येक वर्ष फैक्ट्री से 50 हजार क्विंटल कच्चा बिरोजा आता है। इसमें 65 से 70 प्रतिशत पक्का बिरोजा तथा 15 से 18 प्रतिशत तारपीन तेल निकलता है। यदि फैक्ट्री को तीन शिफ्टों में चलाया जाए तो प्रोडक्शन बढ़ोतरी के साथ ही गुणवत्ता भी बढ़ेगी।