प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए बदली गई प्रक्रिया से राज्य के निजी विश्वविद्यालयों को दोहरा विकल्प मिल गया है। छात्रों के लिए भी कहीं न कहीं एडमिशन की राहत आसान हो गई है।
निजी विवि अब जेईई या तकनीकी विवि की प्रवेश परीक्षा के आधार पर अपने यहां एडमिशन कर सकते हैं। राज्य सरकार ने इंजीनियरिंग कॉलेजों की प्रवेश परीक्षा का जिम्मा तकनीकी विवि हमीरपुर को दिया है, जो एआईसीटीई के मानकों के अनुसार होगा।
अब एआईईईई की बाध्यता खत्म हो गई है, लेकिन इससे निजी विवि को दोहरा विकल्प मिल गया है। राज्य में इस समय 3 सरकारी और 17 प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में करीब 7000 सीटें हैं।
इनमें एडमिशन एआईईईई के जरिये होती थी, लेकिन सरकार ने प्रवेश परीक्षा में बैठने के लिए 60 फीसदी अंकों की शर्त लगा दी थी। इस कारण 80 से 90 फीसदी सीटें खाली रह रही थीं। निजी कॉलेज इस व्यवस्था से परेशान थे।
तकनीकी विवि लेगा प्रवेश परीक्षा
हालांकि, अब भी ये नई व्यवस्था से भी ज्यादा खुश नहीं हैं। नई व्यवस्था में प्रवेश परीक्षा की पात्रता में बड़ी राहत मिल जाएगी। इन कॉलेजों में बीटेक, फार्मेसी, एमबीए और एमसीए आदि की सीटें अब तकनीकी विवि की प्रवेश परीक्षा से भरी जाएंगी।
इसी प्रकार निजी विवि में भी इन कोर्सों में एडमिशन इस टेस्ट से हो सकेगी, लेकिन विवि आल इंडिया परीक्षा जेईई से भी एडमिशन कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार स्वायत्त विवि तीन तरह से एडमिशन कर सकते हैं।
एक अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा से, दूसरा राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षा से और तीसरा विकल्प निजी विवि की यदि कोई एसोसिएशन हो, तो उसकी प्रवेश परीक्षा से।
निजी विश्वविद्यालयों के लिए अच्छा फैसला: ग्रेवाल
चितकारा यूनिवर्सिटी के वीसी रहे ब्रिगेडियर डा. आरएस ग्रेवाल कहते हैं कि हिमाचल के निजी विश्वविद्यालयों के लिए नया फारमेट फायदा देने वाला होगा।
जेईई के अलावा अब निजी विवि तकनीकी विश्वविद्यालय के एंट्रेंस टेस्ट से भी अब एडमिशन हो सकेंगी। इससे खासकर नए विश्वविद्यालयों को लाभ होगा, जिनका बड़ा नाम नहीं है। हालांकि निजी विश्वविद्यालयों के रेगुलेशन की समीक्षा राज्य सरकार को अलग से करनी चाहिए। कुछ प्रावधान काफी सख्त हैं।
जरूरत ही क्या है प्रवेश परीक्षा की: बंसल
प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष रजनीश बंसल का कहना है कि हिमाचल के इंजीनियरिंग कॉलेजों में जम्मू कश्मीर, हरियाणा और उत्तराखंड से छात्र पढ़ने आना चाहते हैं, क्योंकि यहां माहौल शांतिपूर्ण होता है।
ये प्रदेश में होने वाली किसी भी प्रवेश परीक्षा में नहीं बैठ पाते। वैसे भी प्रवेश परीक्षा में परीक्षार्थी का क्या टेस्ट होगा? इसलिए प्रवेश परीक्षा की जरूरत ही क्या है? केवल काउंसलिंग के आधार पर ही एडमिशन होनी चाहिए।