27 नवंबर को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में जेसीसी की बैठक हुई थी जिसमें मुख्य सचिव व अतिरिक्त मुख्य सचिव कार्मिक व अन्य सचिवों ने कर्मचारियों के विभिन्न मुद्दों पर एजेंडावार चर्चा कर निर्णय लिए थे। अब कार्मिक विभाग ने इसकी प्रोसीडिंग तैयार कर दी है। साथ ही इसी प्रोसीडिंग को मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा।
हिमाचल प्रदेश सरकार और कर्मचारियों की संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) की बैठक के बाद अब कार्मिक विभाग ने इसकी प्रोसीडिंग तैयार कर दी है। साथ ही इसी प्रोसीडिंग को मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद संबंधित विभाग अपने अपने विषय से संबंधित एजेंडे को कैबिनेट में ले जाएंगे। वहां से मंजूरी मिलने के बाद उन फैसलों के संबंध में अधिसूचना जारी की जाएगी। इसमें रिवाइज पे स्केल के अलावा डीए और बेसिक बढ़ाने से संबंधित फैसले शामिल हैं। इसको लेकर कर्मचारियों की खासी निगाहें इस प्रोसीडिंग की मंजूरी पर लगी हुई है। बता दें, 27 नवंबर को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में जेसीसी की बैठक हुई थी जिसमें मुख्य सचिव व अतिरिक्त मुख्य सचिव कार्मिक व अन्य सचिवों ने कर्मचारियों के विभिन्न मुद्दों पर एजेंडावार चर्चा कर निर्णय लिए थे।
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वीरेंद्र ने उठाए प्रधानाचार्य पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल
वहीं, हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने प्रधानाचार्य पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल उठा दिए हैं। चौहान ने कहा कि 30 नवंबर को उत्तम सिंह मुख्याध्यापक की पदोन्नति प्रधानाचार्य पद पर की गई। इनका वरिष्ठता नंबर 3048 है। 30 नवंबर को चार मुख्याध्यापक बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो गए। इसमें रतन सिंह का वरिष्ठता नंबर 2952, अजय कुमार का वरिष्ठता नंबर 2968 है। उन्होंने कहा कि यह दोनों उत्तम सिंह से वरिष्ठता में 90 से 96 नंबर पहले हैं। यह लोग उसी दिन सेवानिवृत्त हुए जिस दिन उत्तम सिंह की भी सेवानिवृत्ति थी। उन्होंने कहा कि किस तरह उत्तम सिंह 174 लोगों को पीछे छोड़ कर एक सिंगल ऑर्डर के तहत प्रधानाचार्य बना दिए गए जो कि सीसीएस नियम का सरासर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के इतिहास में इस तरह का मामला पहली बार आया है। चौहान ने कहा कि यदि इस प्रथा को नहीं रोका गया तो भविष्य में कनिष्ठ और वरिष्ठ की परंपरा ही खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तम सिंह की पदोन्नति को निरस्त किया जाए।