हिमाचल सरकार ने इस साल 26 मई के बाद बने नए राशन कार्डों की जांच शुरू करवा दी है। गृहणी सुविधा योजना के तहत निशुल्क गैस कनेक्शन लेने के लिए एक माह के भीतर आए एक लाख छह हजार आवेदनों की वजह से यह जांच बैठाई गई है। शक है कि योजना का लाभ उठाने के लिए परिवारों को तोड़कर नए राशन कार्ड बनाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 26 मई को राजधानी शिमला में गृहणी सुविधा योजना का शुभारंभ किया था। योजना के तहत राज्य के सभी गरीब परिवारों को दो साल के भीतर गैस कनेक्शन देने की घोषणा की गई है। दो साल के दौरान एक लाख परिवारों को इस योजना का लाभ दिया जाना है।
पहले साल में 33500 गैस कनेक्शन देने की बात कही गई। योजना के तहत उन लोगों को भी लाभ दिया जाना है जिनको अभी तक प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत शामिल नहीं किया है। गृहणी सुविधा योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन और गैस चूल्हा निशुल्क मुहैया करवाया जाएगा। राज्य सरकार ने इसके लिए 12 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है।
अफसरों के उड़े होश- बीते एक माह के दौरान निशुल्क गैस कनेक्शन लेने के लिए एक लाख छह हजार आवेदन आ गए हैं। एक साल में जारी किए जाने वाले कनेक्शनों से तीन गुणा अधिक आवेदन आने से अधिकारियों के होश उड़ गए हैं।
लिहाजा, अधिकारियों ने मामले की जानकारी खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री किशन कपूर को दी। विस्तृत चर्चा करने के बाद सरकार ने योजना की घोषणा होने के बाद बने नए राशन कार्डों की जांच का फैसला लिया है।
परिवार रजिस्टर का मांगा है ब्योरा- 26 मई के बाद बने नए राशन कार्डों की जांच की जाएगी। पंचायतीराज और शहरी विकास विभाग से परिवार रजिस्टर का ब्योरा भी मांगा गया है। पात्र लोगों को जल्द से जल्द निशुल्क गैस कनेक्शन मुहैया करवाए जाएंगे। - किशन कपूर, खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री
धरातल पर काम नहीं हुआ तो एसीआर में दिखेगा असर- आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि बागवानी और कृषि विभाग के एसएमएस और एचडीओ समेत अन्य अधिकारियों का काम खेतों में है, लेकिन वे दफ्तरों में बैठे हैं। अधिकतर अधिकारी फील्ड में नहीं जा रहे हैं। कुछ अधिकारी तो बिना मतलब से एडजस्टमेंट लेकर शिमला और जिला मुख्यालयों में जमे हैं। इसमें किसानों और बागवानों का हित नहीं है।
इन कार्यालयों में वर्षों से जमे अधिकारियों का युक्तिकरण किया जाएगा। विभाग के अधिकारी अपने क्षेत्र में दो पंचायतों को गोद लेंगे। यदि इन पंचायतों में सरकार की योजना धरातल पर नहीं उतर पाई तो इसका असर अधिकारियों की एसीआर में दिखेगा। इसके लिए सरकार जल्द ही सख्ती कार्रवाई करेगी। वे जिला शिकायत निवारण समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
उन्होंने बैठक में कोटली क्षेत्र के गैर सरकारी सदस्य के सवाल पर यह प्रतिक्रिया दी। सदस्य ने कोटली क्षेत्र के एक विक्रय केंद्र में अधिकारी न होने की बात बैठक में रखी। इसके बाद मंत्री ने संबंधित विभाग के अधिकारी से जवाब मांगा। अधिकारी के जवाब से सदस्य संतुष्ट नहीं हुए। उनका तर्क था कि इन दिनों जब विक्रय केंद्र में किसान बीज, कीटनाशक अन्य कृषि उत्पादों के लिए पहुंच रहे हैं तो कृषि विक्रय केंद्र पर ताला लटका रहता है।
इस पर अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। आईपीएच मंत्री ने कृषि और बागवानी अधिकारियों का युक्तिकरण करने की बात कही। वर्षों से एक ही कार्यालय में डटे अधिकारी फील्ड में पहुंचे। यदि सरकार की योजनाएं धरातल पर नहीं दिखीं तो इसका सीधा असर अधिकारियों की एसीआर में दिखेगा।