कमीशन को किसी व्यक्ति ने भर्तियों में चहेतों को लाभ देने का आरोप लगाया था। महिला का उत्पीड़न करने की शिकायत भी कमीशन को की गई थी। कमीशन ने संज्ञान लेकर हिमाचल सरकार को जांच के आदेश दिए थे।
कमीशन से प्राप्त पत्र के आधार पर शिक्षा विभाग ने पूर्व कुलपति के खिलाफ जांच बिठाई। जांच कमेटी ने विश्वविद्यालय से भर्तियों का रिकार्ड भी कब्जे में लिया। आरोप सिद्ध करने के लिए शिक्षा विभाग ने शिकायतकर्ता के पते पर कई पत्र भेजे, लेकिन कोई जवाब नहीं आया।
शिकायतकर्ता के पते से भेजे सारे पत्र वापस आ गए। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक किसी व्यक्ति ने गलत नाम और पते से शिकायत की है। ऐसे में जांच को बंद कर दिया गया है।
- असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी देने को 15-15 लाख रुपये लिए
- रिजर्व ओबीसी वर्ग के पद के लिए एक ही व्यक्ति को साक्षात्कार के लिए बुलाया
- एक ऐसे व्यक्ति को नियुक्ति दी, जिसने न नेट क्वालिफाई किया और न ही पीएचडी
- गणित विषय की पात्रता परीक्षा में 64 अंक अर्जित करने वाले को साक्षात्कार में 2 ही अंक दिए
- हिंदी विभाग में 80 में 63 अंक पाने वाले को बाहर कर दिया, कम अंक वाले को नियुक्ति दी
- अर्र्थशास्त्र विषय में पांच साल के अनुभव की शर्त जोड़ी। पद के लिए 14 आवेदन थे। दो लोग इसके लिए पात्र बने। साक्षात्कार में केवल एक व्यक्ति आया और उसे नियुक्ति भी दे दी गई