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Shimla News: प्रति कुलपति को मिल सकता है अब कुलपति का कार्यभार

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प्रो. राजिंद्र और एनके शारदा ने पहले दी हैं सेवाएं
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वर्तमान कार्यवाहक कुलपति जता चुके हैं पदभार मुक्त की इच्छा

अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में तीन सालों से स्थायी कुलपति न होने पर केंद्रीय विवि के कुलपति प्रो. एसपी बंसल ने तीन साल तक एचपीयू के कार्यवाहक कुलपति के रूप में कार्यकाल पूरा कर लिया है।
अब वह स्वास्थ्य और व्यक्तिगत कारणों से कार्यवाहक कुलपति पद की दी गई अतिरिक्त जिम्मेदारी से वह भार मुक्त होने की पेशकश कुलाधिपति से कर चुके हैं। राज्यपाल ने यदि उनके आग्रह को स्वीकार कर लिया तो विवि में कुलपति का पद खाली हो जाएगा। कुलपति के पद पर स्थायी नियुक्ति किए जाने तक विवि, प्रति कुलपति प्रो. राजिंद्र वर्मा को कार्यवाहक कुलपति बनाए जाने का राजभवन और सरकार के पास एक विकल्प रहेगा। विश्वविद्यालय में इससे पूर्व भी दो बार ऐसी स्थिति पैदा हो चुकी है, जिसमें प्रति कुलपति को लंबे समय तक कार्यवाहक कुलपति बनाकर सभी शक्तियों को उपयोग करने की इजाजत दी थी।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एक्ट-1970 में बाकायदा इसका प्रावधान है। एक्ट में 12 (डी) और 12 (बी) में इसका प्रावधान किया है। विवि में 30 जून 2023 को प्रति कुलपति बने प्रो. राजिंद्र वर्मा को स्थायी कुलपति की गैर मौजूदगी और कार्यवाहक कुलपति देखने का प्रशासनिक अनुभव है। ऐसे में सरकार के पास उन्हें स्थायी नियुक्ति किए जाने तक उन्हें जिम्मेदारी सौंपने का विकल्प है। पूर्व में करीब पांच साल एक जुलाई 2014 से 20 जून 2019 तक प्रति कुलपति रहे प्रो. राजिंद्र चौहान को भी तत्कालीन सरकार ने कार्यवाहक कुलपति बनाया था। उन्होंने 2017-18 में करीब डेढ़ साल तक कुलपति पद की पूरी जिम्मेदारी का निर्वहन किया था। प्रो. सिकंदर के कुलपति बनने के बाद ही उन्हें जिम्मेदारी से भार मुक्त किया था। यही नहीं 4 जून 1998 से लेकर 24 अप्रैल 2003 तक विवि के प्रति कुलपति प्रो. एनके शारदा को भी कई माह तक स्थायी कुलपति की गैर मौजूदगी में कुलपति पद की जिम्मेदारी दी थी।
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प्रो. एसपी बंसल को दो-दो विश्वविद्यालयों के मुखिया के रूप में एक साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में दिक्कतें आ रही हैं। अब वह तीन साल कार्यवाहक कुलपति रहने के बाद इस जिम्मेदारी से भार मुक्त होने का मन बना चुके हैं।
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