शिक्षा निदेशालय एचआरटीसी को पत्र लिखकर बसों में बस पास की एवज में हर छात्र को सीट सुनिश्चित करने के लिए दिशा निर्देश देगा। ओवरलोडिंग पर एचआरटीसी बसों पर कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।
उन्होंने बताया कि निजी स्कूलों से फीस स्ट्रक्चर और ऑडिट रिपोर्ट के दस्तावेज मांगे गए हैं। कुछ ऐसे स्कूल हैं, जो बैठकों में नहीं आए हैं। ऐसे स्कूलों को अलग से बुलाकर जानकारी जुटाई जा रही है।
आदेश नहीं मान रहे स्कूलों की जिला स्तर पर गठित विभाग की टीमें छानबीन करेगी। उन्होंने बताया कि भविष्य में स्कूल वर्दी, किताबें और अन्य सामग्री अपनी मर्जी से नहीं बेच सकेंगे।
उन्होंने बताया कि अब तक बने रूल 2003 और एक्ट 1997 का मकसद निजी स्कूलों पर नियंत्रण ही रहा है। इसके तहत कार्रवाई हो सकती है। यदि कानून या निजी स्कूलों के नियंत्रण को नियामक आयोग बनाने की जरूरत महसूस हुई तो इसका प्रस्ताव भी निदेशालय सरकार को भेजेगा।
प्रदेश के निजी स्कूलों को अब सांस्कृतिक व अन्य कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी उच्च शिक्षा निदेशालय से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। इन कार्यक्रमों में बंटने वाले सामान की रेट लिस्ट भी स्कूलों को मंजूर करवानी होगी। अब निजी स्कूल सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों को पहनाई जाने वाले किराए की ड्रेस के लिए अभिभावकों से मनमाफिक पैसा नहीं ले सकेंगे।