अब 5600 के बजाय 6800 रुपये मासिक चुकानी होगी फीस संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी शिमला के निजी स्कूलों ने नए शैक्षणिक सत्र में फीस में 20 फीसदी तक की वृद्धि की है। इससे अभिभावकों में आक्रोश है। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे मध्यम वर्गीय परिवारों पर यह अतिरिक्त बोझ डालना उनके लिए कठिनाई का सबब बन गया है।
शहर के प्रमुख निजी स्कूलों ने वार्षिक शुल्क, ट्यूशन फीस और अन्य संबंधित शुल्कों में 15 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है। शहर के लक्कड़ बाजार डीएवी स्कूल में पिछले सत्र के मुकाबले कक्षा नर्सरी से लेकर बारहवीं तक के विद्यार्थियों के अभिभावकों को अब हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। पिछले साल जहां स्कूल की फीस 5600 प्रति महीना थी अब बढ़कर 6800 रुपये हो गई है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रशासन हर साल बिना किसी ठोस कारण के फीस बढ़ा देता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
अभिभावक राकेश वर्मा ने कहा कि पहले ही बच्चों की यूनिफॉर्म, किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री महंगी हो गई है। अब स्कूल फीस में 20 फीसदी तक की वृद्धि ने बजट को और बिगाड़ दिया है। उन्होंने प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों की फीस संरचना को लेकर एक कानून मसौदा तैयार करने की मांग की है। छात्र अभिभावक मंच के प्रभारी विजेंदर मेहरा ने बताया कि नियमों के अनुसार बिना पीटीए कि अनुमति के फीस नहीं बढ़ाई जा सकती। इसके लिए 2020 में प्रदेश शिक्षा के विभाग ने इस बारे में अधिसूचना जारी की थी। इसके बावजूद स्कूल बिना बताए फीस बढ़ा देते है। वहीं निजी स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बढ़ती महंगाई, शिक्षकों के वेतन और स्कूल के रखरखाव खर्च के चलते फीस बढ़ाना आवश्यक हो गया है। पिछले दो वर्षों से फीस में कोई वृद्धि नहीं की थी।