इसलिए सरकार को चाहिए कि वह निजी बस ऑपरेटरों की पदाधिकारियों के साथ सकारात्मक निर्णय ले तथा कोई न कोई रास्ता निकाले। इसके अतिरिक्त अगर सामाजिक दूरी की गाइडलाइन को पूरा करना है तो निजी बस ऑपरेटर उसे पूरा करने के लिए तैयार हैं। वे 60 प्रतिशत सवारियों की शर्त के अनुसार बसें चलाएंगे। लेकिन, जो 40 प्रतिशत सीटें बचती हैं उसका किराया सब्सिडी के रूप में सरकार वहन करे। न्यूनतम किराया 10 रुपये किया जाए। 5 किलोमीटर तक 10 रुपये, 5 से 10 किलोमीटर तक 20 रुपये और 10 से 15 किलोमीटर तक 30 रुपये किराया निर्धारित किया जाए। सामान्य किराये में कम से कम 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाए।
ऐसा करने से हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसें भी फायदे में चल सकती हैं। बैठक में सिरमौर जिला यूनियन के प्रधान मामराज, रणवीर सिंह, जिला सोलन निजी बस ऑपरेटर यूनियन के प्रधान जॉनी मेहता, नालागढ़ के प्रधान मनोज राणा, जिला शिमला यूनियन के प्रधान जय गोपाल राजटा, राजेश राजटा, मंडी जिला के हंसराज ठाकुर, बिलासपुर से राहुल चौहान, हमीरपुर से शम्मी कपिल, राजकुमार, भारत भूषण कुल्लू से रजत ठाकुर, भूपेश नंदन, कांगड़ा से अखिल सूद, रवि दत्त शर्मा, विनय बेदी, संदीप वालिया सहित लगभग अन्य निजी बस ऑपरेटरों ने भाग लिया।